खनन बनाम जंगल: बैलाडीला में आदिवासियों ने छेड़ी ‘पहाड़ बचाओ’ लड़ाई
बैलाडीला-बचेली पहाड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित खनन को लेकर आदिवासी समाज ने कड़ा विरोध जताया है। बुधवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और खनन प्रक्रिया को रोकने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। आदिवासी नेताओं ने आरोप लगाया कि बिना उनकी सहमति के फर्जी ग्रामसभा दिखाकर खनन की तैयारी की जा रही है।
फर्जी ग्रामसभा के आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि खनन कंपनी द्वारा ग्रामसभा की झूठी सहमति दिखाकर परियोजना को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। आदिवासी प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए वे किसी भी कीमत पर संघर्ष जारी रखेंगे।
सड़क निर्माण पर भी उठे सवाल
आदिवासी समाज ने यह भी आरोप लगाया कि पहाड़ों में बनाई जा रही सड़कें केवल विकास कार्य नहीं, बल्कि खनन की तैयारी का हिस्सा हैं। उनका कहना है कि इससे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय नुकसान हो सकता है।
पर्यावरण और आजीविका पर खतरे की आशंका
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि प्रस्तावित खनन से जंगल, जल स्रोत और स्थानीय लोगों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा। आदिवासी नेताओं ने कहा कि वे अपने प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए लगातार आंदोलन करते रहेंगे।
आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
आदिवासी समाज ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक विरोध और आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
