तमनार हिंसा वीडियो वायरल : महिला आरक्षक से बर्बरता, कपड़े फाड़े गए, दो संदेहियों को पुलिस ने पकड़ा…

तमनार में महिला आरक्षक से बर्बरता

तमनार में महिला आरक्षक से बर्बरता

रायपुर: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में JPL कोयला खदान के विरोध में चल रहे आंदोलन के दौरान एक महिला आरक्षक के साथ बेहद शर्मनाक और अमानवीय घटना सामने आई है। उग्र प्रदर्शनकारियों ने महिला आरक्षक के कपड़े फाड़ दिए, उसे करीब आधा किलोमीटर तक दौड़ाया, और खेत में गिरने के बाद उसे अर्धनग्न कर दिया।

40 सेकेंड का वीडियो वायरल, पुलिस महकमे में हड़कंप

इस पूरी घटना का वीडियो प्रदर्शनकारियों द्वारा बनाया गया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। करीब 40 सेकेंड के वीडियो में महिला आरक्षक रोते हुए प्रदर्शनकारियों से “भाई” कहकर छोड़ने की गुहार लगाती दिखाई दे रही है। वीडियो में प्रदर्शनकारी उसे धमकाते और अपमानित करते नजर आते हैं। घटना के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने दो संदेहियों को हिरासत में लिया है और कार्रवाई तेज कर दी गई है।

मौके पर मौजूद थे 100 से अधिक पुलिसकर्मी

बताया जा रहा है कि घटना के समय मौके पर एक एडिशनल एसपी, एक डीएसपी,
आधा दर्जन थाना प्रभारी (TI) और 100 से अधिक पुलिस जवान मौजूद थे। लेकिन, प्रदर्शन के दौरान जब हालात बिगड़े, तो कुछ वरिष्ठ अधिकारी मौके से चले गए, जिससे स्थिति और अनियंत्रित हो गई। इस संवेदनशील मामले पर रायगढ़ एसपी दिव्यांग पटेल ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है।

मंत्रियों के बयान: घटना निंदनीय, दोषियों पर होगी कार्रवाई

मंत्री टंक राम वर्मा ने इस घटना को गलत और निंदनीय बताया है और कहा है कि
किसी को कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है, शांति से अपनी बात रखनी चाहिए। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव ने इस मामले में कहा कि आंदोलनों के उग्र रूप के पीछे कांग्रेस समर्थित तत्व शामिल है, यह छत्तीसगढ़ की शांत प्रवृत्ति के विपरीत है, ऐसी घटना दुर्भाग्यजनक है ।

14 गांवों का विरोध, कांग्रेस का सरकार पर हमला

घटना के बाद 14 गांवों के ग्रामीणों ने प्रेस नोट जारी कर हिंसा की निंदा की और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि शांतिपूर्ण जनआंदोलन को बदनाम करने की साजिश रची गई।

वहीं कांग्रेस ने इसे भाजपा सरकार के कार्यकाल में पुलिस और प्रशासन के प्रति बढ़ते अविश्वास और आक्रोश का परिणाम बताया है। कांग्रेस ने तमनार, लोहारीडीह और बलौदाबाजार की घटनाओं का हवाला दिया।

जानिए क्या है पूरा मामला :

दरअसल, यह पूरा मामला 8 दिसंबर 2025 को धौराभाठा में आयोजित जनसुनवाई के विरोध से जुड़ा हुआ है। JPL कोयला खदान के सेक्टर-1 कोल ब्लॉक से प्रभावित 14 गांवों के ग्रामीण 12 दिसंबर से धरने पर बैठे थे। इसी क्रम में 27 दिसंबर की सुबह करीब 9 बजे लिबरा चौक पर लगभग 300 ग्रामीण एकत्रित हो गए और सड़क पर बैठकर आवागमन रोक दिया।

भीड़ बढ़कर करीब 1000 के आसपास हो गई:

स्थिति बिगड़ती देख करीब 10 बजे मौके पर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाइश दी और उन्हें धरनास्थल पर लगे टेंट में वापस भेज दिया, जिससे कुछ समय के लिए माहौल शांत हो गया, हालांकि तनाव बना रहा। जिला प्रशासन के अनुसार, आसपास के गांवों से और लोगों के पहुंचने के कारण दोपहर तक भीड़ बढ़कर करीब 1000 के आसपास हो गई।

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तमनार थाना प्रभारी कमला पुसाम के साथ लात-घूंसे से मारपीट:

घरघोड़ा के एसडीएम और पुलिस अधिकारी लगातार माइक के जरिए लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते रहे, लेकिन भीड़ बार-बार सड़क पर आकर रास्ता जाम करने की कोशिश करती रही। करीब ढाई बजे अचानक हालात बेकाबू हो गए। उग्र भीड़ ने पुलिस के बैरिकेड तोड़ दिए और पत्थरों व डंडों से हमला शुरू कर दिया। पुलिस पर जमकर पथराव और लाठीचार्ज जैसी स्थिति बन गई। इसी दौरान तमनार थाना प्रभारी कमला पुसाम के साथ महिलाओं द्वारा लात-घूंसे से मारपीट की गई। इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी और महिला आरक्षक घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

पुलिस बस, जीप और एम्बुलेंस में लगा दी आग:

जिला प्रशासन के मुताबिक, उग्र भीड़ ने मौके पर खड़ी पुलिस बस, जीप और एम्बुलेंस में आग लगा दी, वहीं कई अन्य सरकारी वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया। इसके बाद भीड़ जिंदल के कोल हैंडलिंग प्लांट की ओर बढ़ गई, जहां कन्वेयर बेल्ट, दो ट्रैक्टर और अन्य वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया तथा प्लांट कार्यालय में भी तोड़फोड़ की गई।

हालात काबू में करने के लिए लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार, रायगढ़ कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक स्वयं मौके पर पहुंचे, लेकिन उनकी मौजूदगी में भी भीड़ और अधिक उग्र हो गई। अधिकारियों के सामने भी पथराव हुआ और भीड़ दोबारा प्लांट परिसर में घुसकर आगजनी करती रही।

लगभग 14 गांवों के 4 हजार से अधिक ग्रामीणों ने इस आंदोलन में हिस्सा लिया। उनकी मुख्य मांग थी कि कोल ब्लॉक के लिए प्रस्तावित जनसुनवाई को निरस्त किया जाए। हालात को देखते हुए JPL प्रबंधन ने गारे पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक के लिए जनसुनवाई नहीं कराने का फैसला लिया।

 

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