सूरत में 100 झुग्गियां ध्वस्त, किसी को जवाब नहीं! नगर निगम ने कहा- हमने नहीं किया, पुलिस ने कहा- हम सिर्फ पहरा दे रहे थे, विधायक ने बताया ‘घोस्ट डेमोलिशन’
सूरत के वेद दरवाजा स्थित नासिर नगर में 100 से अधिक झुग्गियां ध्वस्त, न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही कोई विभाग कार्रवाई की जिम्मेदारी ले रहा है।
सूरत। गुजरात के सूरत शहर के वेद दरवाजा इलाके के नासिर नगर में पिछले दिनों 100 से अधिक झुग्गियों को बुलडोजर के माध्यम से पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। आरोप है कि इस कार्रवाई से पहले कोई कानूनी नोटिस नहीं दिया गया। मामला जब तूल पकड़ा तो सवाल उठा कि किसके आदेश पर यह एक्शन हुआ, लेकिन अब इसकी जिम्मेदारी कोई भी सरकारी विभाग लेने को तैयार नहीं है। स्थानीय भाजपा विधायक विनू मोराडिया ने इसे ‘घोस्ट डेमोलिशन’ (प्रेत विध्वंस) करार दिया है।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला, याचिकाकर्ता ने पांच पक्षों को बनाया प्रतिवादी
इस बस्ती में रहने वाले हुसैन अजीज शेख ने सोमवार को गुजरात हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन झुग्गियों को तोड़ने से पहले कानूनी नियमों का पालन नहीं किया गया। याचिकाकर्ता ने कहा कि बिना किसी नोटिस दिए यह कार्रवाई की गई और उन्होंने कोर्ट से इस अभियान पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।
याचिकाकर्ता ने पांच पक्षों को प्रतिवादी बनाया है, जिनमें गुजरात सरकार, सूरत नगर निगम (SMC), सूरत पुलिस कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) शामिल हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि झुग्गी बस्ती के लोगों के घर तोड़े जा रहे हैं, लेकिन प्रशासन की कोई भी एजेंसी इसकी जिम्मेदारी नहीं ले रही है।
नगर निगम बोला- हम नाप-जोख करने गए थे, तोड़ा हमने नहीं
सूरत नगर निगम के कमिश्नर एन नागराजन ने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने कोई तोड़फोड़ का आदेश नहीं दिया था। नागराजन ने बताया कि निगम के अधिकारी वहां तोड़फोड़ करने नहीं, बल्कि सड़क की नाप-जोख (सीमांकन) करने गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि यह जमीन निजी स्वामित्व वाली है और भूखंड का एक हिस्सा टाउन प्लानिंग योजना के तहत सड़क निर्माण के लिए आवंटित किया गया है।
नागराजन के मुताबिक, “हमारा काम पहले सीमांकन करना है और फिर कुछ दिनों बाद विध्वंस करना है। यह विध्वंस हमारे द्वारा नहीं किया गया।”
पुलिस का कहना- हमने सिर्फ सुरक्षा प्रदान की
वहीं, सूरत पुलिस ने सारा दोष नगर निगम पर मढ़ दिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एसएमसी से उन्हें विध्वंस के लिए सुरक्षा उपलब्ध कराने का अनुरोध मिला था। एक अधिकारी ने बताया, “यह एसएमसी की मांग थी, इसलिए हमने कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया।”
इस बीच, रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘आसमानी शर्ट और काली पैंट’ पहने कुछ लोग, जिनके साथ सूरत पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और चौक बाजार पुलिस के जवान थे, विध्वंस टीम का हिस्सा थे। स्थानीय लोगों का दावा है कि जब विध्वंस चल रहा था, तब वहां एसएमसी अधिकारी और पुलिस बल मौजूद था।
भाजपा विधायक ने कहा- कुछ तो गड़बड़ है, बिल्डर से मिली थी जमीन हटाने की डिमांड
स्थानीय भाजपा विधायक विनू मोराडिया ने इस पूरे मामले में ‘कुछ गड़बड़’ होने की बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि नगर निगम के अधिकारी वहां सीमांकन के लिए गए थे, लेकिन जब लोगों ने घर गिराए जाने की बात कही तो उन्हें सही जवाब नहीं मिला।
मोराडिया ने बिल्डरों की संलिप्तता की ओर इशारा करते हुए कहा, “मेरी जानकारी के अनुसार, नासिर नगर के पास एक बिल्डर की जमीन है और वह इन झुग्गियों को हटवाना चाहता था। बिल्डर ने अपने अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट के लिए एक छोटी सड़क की मांग की थी। हम यह भी जानना चाहते थे कि एसएमसी ने पूरी बस्ती क्यों हटा दी। एसएमसी अधिकारियों के बीच कुछ गड़बड़ चल रही है।”
बिल्डर के फायदे के लिए उजाड़े गए आशियाने
स्थानीय निवासियों और सूत्रों के अनुसार, यह पूरी कवायद नासिर नगर के ठीक पीछे बन रहे एक प्राइवेट कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट को रास्ता देने के लिए की गई थी। आरोप है कि बिल्डर के फायदे के लिए रातों-रात सड़क चौड़ी करने का प्लान बनाया गया और सालों से रह रहे लोगों के आशियाने उजाड़ दिए गए।
हैरानी की बात यह है कि बिना किसी आधिकारिक नोटिस या कानूनी प्रक्रिया के इतनी बड़ी कार्रवाई को अंजाम दे दिया गया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली पुलिस मूकदर्शक बनी रही।
पीड़ितों ने क्या कहा?
नासिर नगर की रहने वाली सलीम शेख ने बताया, “मैं ऑटो चलाकर अपने परिवार का पेट पालता हूं। मेरे पिता इस घर में रहते थे और उनके बाद मैं यहां रहने लगा। हम नियमित रूप से एसएमसी को प्रॉपर्टी टैक्स दे रहे हैं और हमारे पास रजिस्टर्ड बिजली-पानी के कनेक्शन हैं।” उन्होंने कहा कि निजी जमीन पर होने के बावजूद सालों से वहां रह रहे लोगों को इस तरह बेदखल करना गलत है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस पार्षद अरशद जड़ियावाला ने बताया कि जब उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों से बात की तो उन्होंने कहा कि वे सिर्फ सड़क सीमांकन करने आए थे। जड़ियावाला का आरोप है कि पुलिस उन्हें वहां से ले गई और उसके बाद विध्वंस शुरू कर दिया गया।
गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने सवाल किया कि अगर नगर निगम ने यह विध्वंस नहीं किया तो वह ‘मिस्टर इंडिया’ कौन है जिसने पुलिस संरक्षण में गरीबों के घर बुलडोजर से ढहा दिए।
प्रशासन ने शुरू की गुप्त जांच
इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गुजरात सरकार ने स्थानीय पुलिस को दरकिनार करते हुए एक गुप्त जांच शुरू कर दी है। सूरत रूरल के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को गृह विभाग के लिए गोपनीय रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
अगली सुनवाई तक निगम से मांगा जवाब
गुजरात हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। कोर्ट ने आगामी सुनवाई के लिए सभी पक्षों को पेश रहने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता की ओर से अगली तारीख तक विध्वंस पर रोक लगाने और पीड़ितों को राहत देने की मांग की गई है।
फिलहाल, यह रहस्य बना हुआ है कि आखिरकार सूरत नगर निगम और पुलिस की मौजूदगी में यह ‘प्रेत विध्वंस’ किसके आदेश पर किया गया। पुलिस की साख दांव पर लग गई है और अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और सरकार की जांच पर टिकी हैं।
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