सुप्रीम कोर्ट ने Samay Raina और शो से जुड़े अन्य लोगों पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
सुप्रीम कोर्ट ने Samay Raina और शो से जुड़े अन्य लोगों पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
क्या Samay Raina की मुश्किलें अब और बढ़ने वाली हैं? सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, बल्कि कोर्ट को गुमराह करने पर भी कड़ी नाराजगी जताई। जानिए पूरा मामला और अदालत ने क्या-क्या कहा।
‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद में सुप्रीम कोर्ट सख्त
कॉमेडियन Samay Raina और विवादित शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ एक बार फिर कानूनी विवादों में घिर गए हैं। दिव्यांगों का मजाक उड़ाने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना समेत शो में शामिल अन्य प्रतिभागियों और मेहमानों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि समय रैना ने कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की और गलत जानकारी दी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना सहित संबंधित लोगों पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया।
दो सप्ताह में जमा करनी होगी जुर्माने की राशि
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित लोगों को दो सप्ताह के भीतर जुर्माने की राशि जमा करनी होगी। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि तय समय सीमा के भीतर राशि जमा नहीं की गई, तो आगे सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही कोर्ट ने समय रैना और अन्य प्रतिभागियों से यह भी पूछा कि इस विवाद के बाद उन्होंने अपने व्यवहार और सोच में सुधार के लिए अब तक क्या कदम उठाए हैं।
कोर्ट में उठा वादे पूरे न करने का मुद्दा
मामले की सुनवाई के दौरान क्योर एसएमए फाउंडेशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि समय रैना ने पहले दावा किया था कि उन्होंने दिव्यांगों के हित में कुछ कार्यक्रम आयोजित किए हैं। लेकिन अदालत के निर्देश के बावजूद उन्होंने संस्था से कोई संपर्क नहीं किया। फाउंडेशन की ओर से यह भी कहा गया कि समय रैना ने अब तक इस पूरे विवाद पर सार्वजनिक रूप से माफी भी नहीं मांगी है।

क्या है पूरा मामला?
क्योर एसएमए फाउंडेशन का आरोप है कि Samay Raina ने अपने स्टैंडअप शो ‘दैट कॉमेडी क्लब’ के दौरान स्पाइनल मस्क्यूलर अट्रॉफी (SMA) से पीड़ित एक नवजात बच्चे का मजाक उड़ाया था। आरोप है कि उन्होंने बच्चे के इलाज में इस्तेमाल होने वाले महंगे इंजेक्शन और उसके भविष्य को लेकर विवादित टिप्पणियां की थीं। इन टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया पर भी काफी विरोध देखने को मिला और मामला अदालत तक पहुंच गया।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन का महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। अदालत ने साफ संकेत दिया कि मनोरंजन या कॉमेडी के नाम पर किसी दिव्यांग, समुदाय या संवेदनशील विषय का मजाक उड़ाना स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट की सख्त टिप्पणी और जुर्माने के आदेश के बाद यह मामला फिर से चर्चा का विषय बन गया है।
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