सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत से इनकार, अन्य आरोपियों को राहत
नई दिल्ली : फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े कथित ‘बड़ी साजिश’ मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। हालांकि, इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों को राहत देते हुए जमानत मंजूर कर ली है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि उमर खालिद और शरजील इमाम की कथित भूमिका अन्य आरोपियों से अलग और अधिक गंभीर प्रतीत होती है, इसलिए उन्हें जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। दोनों पिछले पांच साल से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती
सभी आरोपियों ने फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों की कथित साजिश से जुड़े मामले में जमानत से इनकार करने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के 2 सितंबर 2025 के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस मामले में उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आरोप लगाए गए हैं।
10 दिसंबर 2025 को सुनवाई पूरी होने के बाद जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने पक्ष रखा। आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक सिंघवी, सिद्धार्थ दवे, सलमान खुर्शीद और सिद्धार्थ लूथरा ने विस्तृत दलीलें पेश कीं।
दिल्ली पुलिस का कड़ा विरोध
दिल्ली पुलिस ने जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि फरवरी 2020 के दिल्ली दंगे अचानक नहीं हुए थे, बल्कि इन्हें भारत की संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से पूर्व नियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था। पुलिस के मुताबिक, उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ UAPA और तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि ये आरोपी 2020 के दिल्ली दंगों की कथित ‘बड़ी साजिश’ के सरगना थे। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।
शरजील इमाम और उमर खालिद की दलीलें
शरजील इमाम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने अदालत में दलील दी कि इमाम आतंकवादी नहीं हैं और न ही राष्ट्र-विरोधी। उन्होंने कहा कि शरजील इमाम जन्म से भारतीय नागरिक हैं और अब तक किसी अपराध में दोषी करार नहीं दिए गए। दवे ने यह भी तर्क रखा कि शरजील को 28 जनवरी 2020 को गिरफ्तार किया गया था, जो फरवरी 2020 की हिंसा से पहले की बात है।
उमर खालिद की ओर से कपिल सिब्बल ने दलील दी कि दंगों के समय उनका मुवक्किल दिल्ली में मौजूद नहीं था, इसलिए उसे लंबे समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। गुलफिशा फातिमा की ओर से अभिषेक सिंघवी ने कहा कि उनकी मुवक्किल पिछले छह वर्षों से जेल में हैं और मुकदमे में हो रही देरी “आश्चर्यजनक और अभूतपूर्व” है।
फरवरी 2020 में दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाकों में CAA-NRC विरोधी प्रदर्शनों के दौरान सांप्रदायिक हिंसा भड़की थी। दिल्ली पुलिस ने इसे सुनियोजित साजिश करार दिया और UAPA के तहत कई लोगों को गिरफ्तार किया। उमर खालिद और शरजील इमाम मुख्य आरोपी बताए गए। दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत याचिकाएं खारिज की थीं, जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी।
शीर्ष अदालत के इस फैसले से दिल्ली दंगा साजिश मामले में जांच एजेंसी को राहत मिली है, जबकि आरोपी पक्ष ने इसे झटका माना है। मामले में ट्रायल अभी भी दिल्ली की विशेष अदालत में चल रहा है।
