प्रदेश की स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में संवाद ऑडिटोरियम, रायपुर में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा आयोजित प्रेसवार्ता में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की वर्तमान स्थिति, पिछले दो वर्षों की उपलब्धियों और आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना पर विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम की रूपरेखा साझा की गई।
प्रेसवार्ता में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रतिनिधि, चिकित्सा शिक्षा विभाग, आयुष विभाग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारी, मीडिया प्रतिनिधि एवं विकास साझेदार मौजूद रहे। बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, नई योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, टीबी मुक्त भारत अभियान और फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम को गति देने पर विशेष जोर दिया गया। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेजों की स्थापना तथा इन्फ्लूएंजा जैसी स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने की तैयारियों पर भी चर्चा हुई।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि उनकी रोकथाम, समय पर पहचान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराकर नागरिकों को स्वस्थ जीवन देना है। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया, जिसे आम बोलचाल में हाथीपांव कहा जाता है, संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलने वाली गंभीर बीमारी है। इसके लक्षण कई वर्षों बाद सामने आते हैं और एक बार बीमारी हो जाने पर पूर्ण उपचार संभव नहीं होता, इसलिए बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है।
इसी उद्देश्य से 10 फरवरी 2026 से 28 फरवरी 2026 तक राज्य के 18 जिलों के 65 प्रभावित विकासखंडों में सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत 1 करोड़ 58 लाख से अधिक लोगों को दवा सेवन कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर और निर्धारित बूथों पर पात्र नागरिकों को अपने सामने निःशुल्क फाइलेरिया रोधी दवाएं खिलाएंगे।
15 जिलों रायपुर (शहरी सहित), गरियाबंद, बलौदाबाजार, महासमुंद, बिलासपुर (शहरी सहित), मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, जांजगीर-चांपा, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, सरगुजा (शहरी सहित), सूरजपुर, जशपुर, बालोद और रायगढ़ (शहरी सहित) में आईवरमेक्टिन, डीईसी और एल्बेंडाजोल (आईडीए) के संयोजन से दवा सेवन कराया जाएगा। वहीं बस्तर (जगदलपुर), राजनांदगांव और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में डीईसी और एल्बेंडाजोल (डीए) के माध्यम से दवा दी जाएगी।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। हालांकि 2 वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को दवा नहीं दी जाएगी। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे स्वास्थ्यकर्मियों के सामने दवा का सेवन करें और दवाएं खाली पेट न लें।
अंत में उन्होंने मीडिया, जनप्रतिनिधियों, पंचायतों, नगरीय निकायों और सामाजिक संगठनों से अपील की कि फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को जनआंदोलन बनाने में सहयोग करें, ताकि राज्य को इस बीमारी से मुक्त किया जा सके।
