सिम नहीं तो WhatsApp बंद! सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना किया, जानिए कब तक का है समय?

SIM Binding Rules : केंद्र सरकार ने ‘सिम बाइंडिंग’ नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की समयसीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया है। नए नियमों के तहत जिस सिम कार्ड से मैसेजिंग ऐप रजिस्टर्ड है, उसका मोबाइल में मौजूद होना अनिवार्य होगा।

सरकार का दावा है कि इस कदम से फर्जी नंबर और डिजिटल फ्रॉड पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा सर्वोपरि है और सिम-बाइंडिंग नियमों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

WhatsApp पर क्या पड़ेगा असर?

नियम लागू होने के बाद यदि फोन में वही सिम कार्ड मौजूद नहीं है, जिससे WhatsApp या Telegram रजिस्टर्ड है, तो ऐप का उपयोग सीमित हो सकता है या बंद भी हो सकता है।

WhatsApp Web हर छह घंटे में स्वतः लॉगआउट हो सकता है।

दोबारा लॉगिन के लिए QR कोड स्कैन करना अनिवार्य होगा।

एक ही नंबर से कई डिवाइस पर अकाउंट चलाने वाले यूजर्स प्रभावित हो सकते हैं।

 

भारत में करोड़ों यूजर्स एक ही नंबर का WhatsApp अलग-अलग डिवाइस पर इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में नए नियमों का बड़ा असर देखने को मिल सकता है।

कौन होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित?

वे यूजर्स जो एक सिम से कई डिवाइस पर WhatsApp चलाते हैं।

बार-बार सिम कार्ड बदलने वाले लोग।

छोटे और मध्यम व्यवसाय, जो WhatsApp आधारित सेवाओं पर निर्भर हैं अनुमान है कि 60-80% छोटे बिजनेस को ऑपरेशनल दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

अन्य ऐप्स भी दायरे में

यह बदलाव केवल WhatsApp तक सीमित नहीं है। Signal सहित अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म भी इसके दायरे में बताए जा रहे हैं। इससे पूरे डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

फिलहाल संकेत साफ हैं कि सरकार सिम-बाइंडिंग नियमों पर पीछे हटने के मूड में नहीं है। 1 मार्च को लेकर काउंटडाउन जारी है और टेक कंपनियों के साथ-साथ करोड़ों यूजर्स की नजरें इस फैसले पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा कि नियम किस रूप में लागू होते हैं और आम उपयोगकर्ताओं के अनुभव में कितना बदलाव आता है।

 

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