डॉग बाइट के बढ़ते मामले: अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन की भारी कमी, अधूरा इलाज बढ़ा रहा संक्रमण का खतरा

एंटी-रेबीज वैक्सीन की भारी कमी

रायपुर: शहर के अलग-अलग इलाकों में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। रोजाना डॉग बाइट के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे लोगों में डर का माहौल बना हुआ है।

सरकारी अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन की भारी कमी

डॉग बाइट के बढ़ते मामलों के बीच सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में जीवनरक्षक एंटी-रेबीज इंजेक्शन की भारी कमी सामने आई है। मरीजों को समय पर वैक्सीन नहीं मिल पा रही है, जिसके चलते उन्हें बार-बार सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई जगहों पर पहला डोज तो किसी तरह दिया जा रहा है, लेकिन दूसरे और आगे के डोज उपलब्ध न होने के कारण मरीजों का पूरा इलाज अधूरा रह जा रहा है। इससे संक्रमण और रेबीज के खतरे को लेकर चिंता बढ़ गई है।

मरीजों को बाजार से खरीदनी पड़ रही महंगी वैक्सीन

सरकारी अस्पतालों में मुफ्त मिलने वाली एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध न होने के कारण कई मरीजों को मजबूरी में निजी मेडिकल स्टोर से इंजेक्शन खरीदना पड़ रहा है, जिसकी कीमत 600 से 1200 रुपये तक पहुंच रही है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।

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स्वास्थ्य केंद्रों में गंभीर स्टॉक संकट

विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी डॉक्टरों के अनुसार, रेबीज वैक्सीन की डिमांड लगातार भेजी जा रही है, लेकिन सप्लाई समय पर नहीं मिल रही। कई जगह 15 से 20 दिन बाद केवल सीमित मात्रा में स्टॉक आता है, जो कुल जरूरत का सिर्फ 15 से 20 प्रतिशत ही होता है।

कई इलाकों में वैक्सीन की स्थिति चिंताजनक

गुढ़ियारी स्वास्थ्य केंद्र: हर महीने 600 डोज की जरूरत, केवल 60–70 डोज उपलब्ध
बीरगांव: 450 डोज की आवश्यकता, मात्र 100 डोज स्टॉक
भाठागांव: 400 डोज की जरूरत, केवल 50 डोज उपलब्ध
रामनगर: 400 डोज की आवश्यकता, 40–50 डोज ही मौजूद
खोखोपारा: 400 डोज की जरूरत, सिर्फ 80 डोज स्टॉक
लोगों की बढ़ती परेशानी और स्वास्थ्य जोखिम

वैक्सीन की कमी के कारण मरीज समय पर पूरा कोर्स नहीं कर पा रहे हैं, जिससे रेबीज संक्रमण का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉग बाइट के बाद तुरंत और पूरा इलाज न मिलने से स्थिति गंभीर होती जा रही है।

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