12 वर्षों से लंबित प्राचार्य पदोन्नति को लेकर वरिष्ठ व्याख्याताओं में निराशा, मुख्यमंत्री से न्याय की उम्मीद
प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में 12 वर्षों से लंबित प्राचार्य पदोन्नति को लेकर वरिष्ठ व्याख्याता और प्रधान पाठकों में गहरी निराशा छाई हुई है। इस मुद्दे को लेकर “छत्तीसगढ़ राज्य प्राचार्य पदोन्नति संघर्ष मोर्चा” और “छत्तीसगढ़ प्रगतिशील एवं नवाचारी शिक्षक महासंघ (CGPITF)” ने सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
प्रदेश संयोजक सतीश प्रकाश सिंह ने मंत्रालय महानदी भवन और इंद्रावती भवन में संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि “टी संवर्ग” के प्राचार्य पदों पर निष्पक्ष व पारदर्शी काउंसलिंग कर शीघ्र पदस्थापना आदेश जारी किया जाए। उन्होंने कहा कि योग्य और वरिष्ठ व्याख्याता व प्रधान पाठक पदोन्नति के पात्र होने के बावजूद सालों से पद से वंचित हैं।
सतीश सिंह ने बताया कि माननीय हाईकोर्ट ने 1 जुलाई 2025 को अपने आदेश में प्राचार्य पदोन्नति पर लगी रोक हटाई थी, जिससे रास्ता तो साफ हुआ है, लेकिन “ई संवर्ग” की याचिका का फैसला अब तक लंबित है, जिसके चलते उस संवर्ग की पदोन्नति अटकी हुई है। हालांकि स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि “टी संवर्ग” की काउंसलिंग की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि यदि 10 दिनों के भीतर पदोन्नति प्रक्रिया शुरू नहीं होती, तो मोर्चा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सीधे मुलाकात कर इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की मांग करेगा।
सतीश प्रकाश सिंह ने मांग की है कि 30 अप्रैल 2025 को जारी प्राचार्य पदोन्नति आदेश में जो लोग अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, उनके स्थान पर प्रतीक्षा सूची के पात्र उम्मीदवारों को शामिल कर सूची में संशोधन किया जाए। साथ ही, उन्होंने यह भी मांग की है कि जो व्याख्याता पहले प्रधान पाठक रह चुके हैं, उन्हें वरिष्ठता के आधार पर प्राचार्य पद पर पदोन्नति का लाभ दिया जाए।
अंत में उन्होंने कहा कि यह आवश्यक है कि प्रदेश के प्राचार्यविहीन स्कूलों में शीघ्र प्राचार्य पदस्थ किए जाएं, जिससे न केवल शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ हो सके, बल्कि राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार हो।
