Satluj OTT Controversy: 48 घंटे में OTT से हटाई गई ‘सतलज’, कुणाल कामरा ने सेंसर बोर्ड पर साधा निशाना

Satluj OTT Controversy

Satluj OTT Controversy: OTT से ‘सतलज’ हटने के बाद सेंसरशिप को लेकर एक बार फिर तेज हुई बहस

Satluj OTT Controversy: चार साल तक रिलीज का इंतजार, फिर बिना कट के OTT पर एंट्री और सिर्फ 48 घंटे में गायब… आखिर ‘सतलज’ के साथ ऐसा क्या हुआ? जानिए क्यों कुणाल कामरा ने CBFC पर लगाए गंभीर आरोप और क्या है पूरा विवाद।

Satluj OTT Controversy: ‘सतलज’ विवाद पर भड़के कुणाल कामरा

Satluj OTT Controversy: अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलज’ एक बार फिर विवादों में आ गई है। करीब चार साल तक रिलीज का इंतजार करने के बाद फिल्म हाल ही में OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर बिना किसी कट के रिलीज हुई, लेकिन रिलीज के 48 घंटे के भीतर ही इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। फिल्म के हटते ही सोशल मीडिया पर सेंसरशिप को लेकर बहस छिड़ गई। इस पूरे मामले पर अब कॉमेडियन कुणाल कामरा ने भी खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है और सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

CBFC चेयरमैन को लिखा खुला पत्र

कुणाल कामरा ने CBFC के चेयरपर्सन प्रसून जोशी को खुला पत्र लिखते हुए पूछा कि आखिर फिल्म ‘पंजाब ’95’ (जिसका नाम बाद में बदलकर ‘सतलज’ किया गया) के लिए 127 कट्स क्यों सुझाए गए थे। उन्होंने कहा कि जब CBFC का अधिकार क्षेत्र OTT प्लेटफॉर्म और अंतरराष्ट्रीय रिलीज पर लागू नहीं होता, तो फिर फिल्म को रिलीज के कुछ ही समय बाद हटाने की स्थिति क्यों बनी?

कामरा ने सवाल उठाया कि अगर किसी सच्ची घटना और दस्तावेजी तथ्यों पर आधारित फिल्म भारतीय दर्शकों तक नहीं पहुंच सकती, तो जनता को इसका कारण जानने का अधिकार है।

जसवंत सिंह खालरा की कहानी पर उठाया सवाल

कुणाल कामरा ने कहा कि फिल्म दिवंगत मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने मानवाधिकार उल्लंघनों को उजागर किया था और इसके लिए अपनी जान गंवा दी। उनके मुताबिक यदि ऐसी ऐतिहासिक और तथ्य आधारित कहानियां भी दर्शकों तक नहीं पहुंच सकतीं, तो यह फिल्म निर्माताओं के लिए गलत संदेश है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इससे उन निर्देशकों और प्रोडक्शन हाउसों का मनोबल टूटता है जो संवेदनशील सामाजिक विषयों पर फिल्में बनाना चाहते हैं।

Satluj OTT Controversy: सेंसर बोर्ड के दोहरे रवैये पर उठाए सवाल

कामरा ने अपने पत्र में सेंसर बोर्ड के फैसलों में कथित असमानता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक रूप से संवेदनशील फिल्मों को आसानी से मंजूरी मिल जाती है, जबकि कुछ फिल्में वर्षों तक रिलीज का इंतजार करती रहती हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ‘द कश्मीर फाइल्स’, ‘द बंगाल फाइल्स’ और ‘द केरल स्टोरी’ जैसी फिल्मों को बिना ज्यादा अड़चनों के रिलीज की अनुमति मिली, जबकि दूसरी फिल्मों को लंबी सेंसर प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

Satluj OTT Controversy: ‘डायरेक्टर की चार साल की कमाई पर दावत उड़ाने जैसा’

कुणाल कामरा ने फिल्म निर्माताओं की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि किसी निर्देशक के चार साल की मेहनत और कमाई को इस तरह रोक देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर किसी फिल्म को वर्षों तक रोके रखने और फिर अचानक हटाने की जिम्मेदारी कौन लेगा?

उन्होंने यह भी कहा कि यदि फिल्म निर्माता बिना अनावश्यक देरी के उन लोगों की कहानियां भी नहीं दिखा सकते जिन्होंने न्याय के लिए संघर्ष किया, तो रचनात्मक स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

Satluj OTT Controversy

48 घंटे में क्यों हटी फिल्म?

निर्देशक हनी त्रेहान की इस फिल्म का मूल नाम ‘पंजाब ’95’ था, जिसे बाद में बदलकर ‘सतलज’ कर दिया गया। फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालरा की भूमिका निभाई है। चार साल तक सेंसर संबंधी विवादों में फंसी रहने के बाद फिल्म आखिरकार ZEE5 पर रिलीज हुई, लेकिन दो दिन के भीतर ही इसे प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। हालांकि, इसे हटाने की आधिकारिक वजह अभी तक स्पष्ट नहीं की गई है।

सेंसरशिप पर फिर छिड़ी नई बहस

फिल्म के हटने के बाद सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सेंसरशिप और OTT प्लेटफॉर्म की स्वायत्तता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। कई लोग फिल्म को दोबारा रिलीज करने की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग इस पूरे मामले में पारदर्शिता की जरूरत बता रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि फिल्म दोबारा स्ट्रीम होगी या नहीं और CBFC तथा संबंधित पक्ष इस विवाद पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हैं।

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