Religious Conversion Dispute: धर्मांतरण को लेकर विवाद के बाद निकला समाधान, धमतरी में हिंदू रीति-रिवाज से हुआ महिला का अंतिम संस्कार
धमतरी। Religious Conversion Dispute: जिले में धर्मांतरण और महिला के अंतिम संस्कार को लेकर पैदा हुआ विवाद आखिरकार आपसी सहमति और प्रशासन की समझाइश के बाद समाप्त हो गया। ओडिशा सीमा से सटे ग्राम बोराई में एक महिला की मौत के बाद शव को दफनाने को लेकर क्रिसमस डे पर तनाव की स्थिति बन गई थी, लेकिन देर रात हुई ग्रामीणों की बैठक के बाद समाधान निकल आया।
जानकारी के मुताबिक, साहू समाज की महिला ने कुछ वर्ष पहले ईसाई धर्म अपनाया था। 24 दिसंबर को महिला के निधन के बाद परिजन गांव में ही शव दफनाने की तैयारी कर रहे थे, जिसका गांव के कुछ लोगों ने विरोध किया। विरोध बढ़ने पर परिजन शव को लेकर नगरी पहुंचे और वहां दफनाने के लिए गड्ढा भी खोदा गया, लेकिन इसकी सूचना मिलते ही नगरी नगर के लोगों ने भी आपत्ति जताई, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
गांव के बाहर ले जाने पर भी बढ़ा विवाद
स्थिति बिगड़ते देख पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। दोनों पक्षों से बातचीत और समझाइश के बाद शव को पुनः ग्राम बोराई ले जाने का निर्णय लिया गया। इसके बाद गांव में देर रात तक ग्राम स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें समाधान पर चर्चा की गई।
हिंदू धर्म में वापसी पर बनी सहमति
बैठक में यह सहमति बनी कि यदि मृतका का परिवार ईसाई धर्म त्यागकर अपने मूल हिंदू धर्म में वापसी करता है और हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार करता है, तभी गांव में अंतिम संस्कार की अनुमति दी जाएगी। सहमति बनने के बाद शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे शव को गांव के श्मशान घाट ले जाकर हिंदू परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया।
ग्रामीणों का बयान
ग्रामीण डीके साहू ने बताया कि मृतका का परिवार पहले हिंदू था और बाद में ईसाई धर्म में चला गया था। गांव की बैठक में 12 जातियों के लोग शामिल हुए, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। परिवार की ओर से लिखित में दिया गया कि वे भविष्य में हिंदू धर्म नहीं छोड़ेंगे। परिवार ने कहा कि उन्हें गांव में ही रहना है और गांव के साथ ही जीवन बिताना है।
प्रशासन की समझाइश से सुलझा मामला
बेलरगांव के तहसीलदार अखिलेश देशलहरे ने बताया कि ग्राम बोराई निवासी पुनिया बाई साहू की 24 दिसंबर को मृत्यु हुई थी। चूंकि वे धर्मांतरित ईसाई थीं, इसलिए अंतिम संस्कार को लेकर विवाद खड़ा हुआ। शासन-प्रशासन ने दोनों पक्षों से चर्चा कर आपसी सहमति से अंतिम संस्कार कराया। पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही।
