Red Sea Internet Cable Damage : हूती विद्रोहियों पर शक, भारत समेत एशिया में इंटरनेट प्रभावित

लाल सागर (Red Sea) के नीचे बिछी अंडरसी इंटरनेट केबल्स डैमेज हो गई हैं, जिसके चलते भारत समेत कई एशियाई देशों में इंटरनेट सेवाओं पर असर पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना के बाद कई जगहों पर इंटरनेट स्पीड बेहद धीमी हो गई है और लोगों को कनेक्टिविटी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इंटरनेट मॉनिटरिंग एजेंसी NetBlocks ने भी इस स्थिति की पुष्टि की है।

हूती विद्रोहियों पर शक

मीडिया रिपोर्ट्स में आशंका जताई जा रही है कि यमन के हूती विद्रोही इन अंडरसी केबल्स को निशाना बना सकते हैं। कहा जा रहा है कि यह कदम इजरायल पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, हूती विद्रोही पहले भी इस तरह की घटनाओं में शामिल होने से इनकार कर चुके हैं।

इंटरनेट लेटेंसी बढ़ने की संभावना

टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट ने भी पुष्टि की है कि रेड सी एरिया में अंडरसी केबल्स डैमेज होने से इंटरनेट लेटेंसी (डेटा ट्रांसफर की गति) प्रभावित हो सकती है। हालांकि, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो केबल्स मिडिल ईस्ट से होकर नहीं गुजरतीं, वे इस समस्या से प्रभावित नहीं होंगी।

अंडरसी केबल क्या होती है?

अंडरसी केबल्स समुद्र के भीतर बिछाई जाने वाली फाइबर-ऑप्टिक केबल्स होती हैं। इनके जरिए न सिर्फ इंटरनेट चलता है, बल्कि टेलीफोन कॉल और डेटा ट्रांसफर भी संभव होता है। इन केबल्स के जरिए लाइट सिग्नल की मदद से डेटा बेहद तेज़ी से दुनिया के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचता है। इन्हीं को पूरी दुनिया की इंटरनेट कनेक्टिविटी की रीढ़ (Backbone) माना जाता है।

ग्लोबल कनेक्टिविटी पर असर

रेड सी के रास्ते बिछी ये केबल्स ग्लोबल नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके डैमेज होने से न केवल भारत, बल्कि एशिया के कई देशों में इंटरनेट यूजर्स को समस्या हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन केबल्स की मरम्मत जल्द नहीं की गई, तो समस्या और गंभीर हो सकती है और ग्लोबल इंटरनेट कनेक्टिविटी पर बड़ा असर पड़ सकता है।

 

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