Delhi Pollution: दिल्ली की ‘जहरीली हवा’ पर नया खुलासा — पराली नहीं, बल्कि इस वजह से बढ़ा जहर
Delhi Air Pollution
Delhi Pollution: देश की राजधानी दिल्ली इन दिनों घने प्रदूषण की चादर में लिपटी हुई है। सुप्रीम कोर्ट भी इस गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त कर चुका है। पराली जलाने की घटनाएं पिछले कई वर्षों की तुलना में इस बार काफी कम हुई हैं, फिर भी दिल्ली-एनसीआर की हवा बेहद प्रदूषित है। अब एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इस जहरीली हवा की मुख्य वजह वाहनों और स्थानीय स्रोतों से निकलने वाला प्रदूषण है, न कि पराली।
CSE का 59 दिनों का बड़ा अध्ययन
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के 22 वायु-गुणवत्ता केंद्रों पर 59 दिनों तक अध्ययन किया गया। इसमें सामने आया कि 30 से अधिक दिनों तक कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) का स्तर तय मानकों से ऊपर रहा। सबसे खराब स्थिति द्वारका सेक्टर-8 में देखी गई, जहां 55 दिनों तक CO का स्तर सीमा से अधिक मिला।
जहांगीरपुरी और DU नॉर्थ कैंपस में भी गंभीर हालात
रिपोर्ट में बताया गया कि जहांगीरपुरी तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तर परिसर में 50 दिनों तक CO का स्तर खतरनाक स्तर पर रहा। विश्लेषण में यह भी सामने आया कि राजधानी में कई नए ऐसे हॉटस्पॉट उभरे हैं, जहां प्रदूषण का स्तर लगातार शहर के औसत से बहुत ज्यादा बना रहता है।
दिल्ली के सबसे प्रदूषित इलाके
CSE के अनुसार, जहांगीरपुरी इस समय दिल्ली का सबसे प्रदूषित क्षेत्र है। यहां सालभर का पीएम2.5 औसत 119 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज हुआ। इसके बाद बावाना और वज़ीरपुर में यह स्तर 113 माइक्रोग्राम पाया गया। आनंद विहार, मुंडका, रोहिणी और अशोक विहार में भी स्थिति बेहद चिंताजनक रही।
नए प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान
CSE ने विवेक विहार, अलीपुर, नेहरू नगर, सिरी फोर्ट, द्वारका सेक्टर 8 और पटपड़गंज जैसे कई नए क्षेत्रों को प्रदूषण हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया है। रिपोर्ट में कहा गया कि अब दिल्ली-एनसीआर के छोटे शहर भी उसी तरह स्मॉग झेल रहे हैं, जैसे मुख्य राजधानी क्षेत्र।
NCR के छोटे शहर भी स्मॉग से बेहाल
इस साल NCR के छोटे शहरों में भी लंबे समय तक स्मॉग की स्थिति बनी रही। बहादुरगढ़ में 9 नवंबर से 18 नवंबर तक लगातार 10 दिनों तक स्मॉग रहा। यह साफ संकेत है कि पूरा एनसीआर अब एक संयुक्त वायु क्षेत्र की तरह व्यवहार कर रहा है, जहां प्रदूषण लगातार उच्च स्तर पर बना रहता है।
PM2.5, NO2 और CO के ‘जहरीले मिश्रण’ ने बढ़ाई मुश्किल
रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरुआती सर्दियों से ही राजधानी में PM2.5, NO2 और CO का खतरनाक मिश्रण तेजी से बढ़ा है। ये सभी प्रदूषक मुख्य रूप से वाहनों और दहन स्रोतों से निकलते हैं। सुबह 7–10 बजे और शाम 6–9 बजे के बीच प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक रहा, क्योंकि भारी ट्रैफिक और ठंडी हवा की पतली परत के कारण धुआं नीचे ही जमा हो जाता है।
पराली जलाने में कमी का कोई असर नहीं दिखा
CSE ने साफ कहा कि इस साल पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं काफी कम हुई थीं, जिसका कारण बाढ़ के कारण बिगड़ा फसल चक्र भी रहा। इसके बावजूद दिल्ली की हवा साफ नहीं हुई, जिससे यह साबित होता है कि मुख्य प्रदूषण स्रोत अब पराली नहीं, बल्कि दिल्ली के भीतर का उत्सर्जन है।
