राजपाल यादव को कोर्ट का तगड़ा झटका: फिर जाना होगा जेल
बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामले में उन्हें दी गई अंतरिम राहत समाप्त करते हुए सरेंडर करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले के दौरान दिए गए आश्वासनों का पालन नहीं किया गया, इसलिए राहत जारी रखने का कोई आधार नहीं बनता। इसके साथ ही निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को भी बरकरार रखा गया है।
5 करोड़ रुपये के कर्ज से जुड़ा है मामला
यह मामला वर्ष 2010 में फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए लिए गए करीब 5 करोड़ रुपये के ऋण से जुड़ा है। आर्थिक नुकसान के कारण समय पर भुगतान नहीं हो सका और कर्ज चुकाने के लिए जारी किए गए कई चेक बैंक से बाउंस हो गए। इसके बाद संबंधित कंपनी ने परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 के तहत कई शिकायतें दर्ज कराईं।
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ट्रायल कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
साल 2018 में ट्रायल कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को चेक बाउंस मामलों में छह महीने की सजा सुनाई थी। इसके बाद सत्र अदालत ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। अपील के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें अस्थायी राहत देते हुए बकाया राशि जमा करने के लिए कई अवसर प्रदान किए थे।
अदालत ने आचरण पर जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी की ओर से भुगतान को लेकर कई बार भरोसा दिलाया गया, लेकिन तय शर्तों का पालन नहीं किया गया। अदालत ने इसे गंभीर मानते हुए अंतरिम राहत समाप्त कर दी और संबंधित अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का निर्देश जारी किया।
अब आगे की प्रक्रिया पर रहेगी नजर
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया निचली अदालत के स्तर पर आगे बढ़ेगी। यदि भविष्य में कोई नई कानूनी राहत नहीं मिलती है तो अभिनेता को अदालत के आदेशों का पालन करना होगा।
