नए साल से पहले बड़ा फैसला, रायपुर में 23 जनवरी से पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में साल की अंतिम कैबिनेट बैठक में राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। यह व्यवस्था 23 जनवरी 2026 (राष्ट्रीय मतदाता दिवस) से प्रभावी होगी। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कैबिनेट के इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि इससे राजधानी की कानून-व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा और अपराध नियंत्रण में तेजी आएगी।
मुख्यमंत्री की स्वतंत्रता दिवस घोषणा को मिली मंजूरी
स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त 2025) पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर में पुलिस आयुक्त (कमिश्नरेट) प्रणाली लागू करने की घोषणा की थी। कैबिनेट ने इस घोषणा को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले से रायपुर अब दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, भोपाल, इंदौर जैसे महानगरों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा।
क्या है पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली?
पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम में शहर की पुलिस कमान एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी (आमतौर पर डीजी, एडीजी या आईजी रैंक) को सौंपी जाती है, जिसे पुलिस आयुक्त कहा जाता है। यह अधिकारी सीधे राज्य सरकार के अधीन कार्य करता है। कमिश्नरेट लागू होने पर शहर की कानून-व्यवस्था, अपराध जांच और सार्वजनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी पूरी तरह आयुक्त के पास होगी।
पुलिस आयुक्त को मिलेंगे ये विशेष अधिकार
धारा 144 लगाने, कर्फ्यू घोषित करने का अधिकार
धरना-प्रदर्शन, जुलूस, रैली की अनुमति देना/रोकना
आर्म्स एक्ट के तहत लाइसेंस जारी करना/रद्द करना
बड़े सार्वजनिक आयोजनों (मेला, उत्सव, खेल) की अनुमति
जिला बदर, बाहरी तत्वों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई
त्वरित निर्णय लेने की शक्ति (कलेक्टर/मजिस्ट्रेट पर निर्भरता खत्म)
इससे पुलिस को आपात स्थिति में तेज और स्वतंत्र कार्रवाई करने की शक्ति मिलेगी, जिससे अपराध पर तुरंत अंकुश लगेगा।
कलेक्टर के अधिकार सीमित होंगे
कमिश्नरेट लागू होने के बाद कलेक्टर मुख्य रूप से राजस्व (भू-राजस्व, जमीन विवाद) से जुड़े कार्यों तक सीमित रहेंगे। कानून-व्यवस्था और अनुमति संबंधी अधिकांश कार्य पुलिस आयुक्त के पास चले जाएंगे।
एसपी और आईजी की भूमिका क्या होगी?
यदि पूरा रायपुर जिला कमिश्नरेट के अंतर्गत आता है, तो मौजूदा एसपी/आईजी को डीसीपी (डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस) बनाया जा सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग से एसपी (रूरल) की नियुक्ति हो सकती है।
शहर की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी पूरी तरह पुलिस आयुक्त के पास होगी।
कैबिनेट के अन्य फैसले
बैठक में रायपुर के विकास, ट्रैफिक प्रबंधन, महिला सुरक्षा और साइबर क्राइम पर भी चर्चा हुई। सरकार ने कहा कि कमिश्नरेट सिस्टम से रायपुर को एक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आधुनिक महानगर बनाने में मदद मिलेगी।
यह फैसला रायपुरवासियों के लिए नए साल का सबसे बड़ा तोहफा माना जा रहा है। जल्द ही पुलिस आयुक्त की नियुक्ति और अन्य तैयारियां पूरी की जाएंगी।
