तेल संकट के बीच रेलवे बना लोगों का सहारा, ट्रेनों और बसों में बढ़ी भीड़

देशभर में गहराते पेट्रोल-डीजल संकट ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर बड़ा असर डालना शुरू कर दिया है। कई जगहों पर पेट्रोल पंपों में सीमित मात्रा में ईंधन मिलने और लंबी कतारों के कारण लोग अब निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने लगे हैं। ऐसे हालात में भारतीय रेलवे एक बार फिर आम लोगों के लिए राहत का सबसे भरोसेमंद साधन बनकर सामने आया है। लंबी और मध्यम दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों ने अब ट्रेन को सबसे बेहतर और किफायती विकल्प मानना शुरू कर दिया है।

रायपुर रेल मंडल की ट्रेनों में अचानक बढ़ी भीड़

गुरुवार को रायपुर रेल मंडल के कई प्रमुख रूटों पर यात्रियों की संख्या में अचानक भारी इजाफा देखने को मिला। रायपुर से बिलासपुर, भिलाई, राजनांदगांव, कोरबा, रायगढ़, गोंदिया और कटनी रूट पर चलने वाली लोकल और एक्सप्रेस ट्रेनों में सामान्य दिनों की तुलना में काफी ज्यादा भीड़ नजर आई। खासतौर पर सुबह और शाम के समय चलने वाली लोकल ट्रेनों में यात्रियों की संख्या इतनी बढ़ गई कि कई लोगों को खड़े होकर सफर करना पड़ा। रेलवे स्टेशन पर टिकट काउंटरों के बाहर भी लंबी कतारें लगी रहीं।

निजी वाहन छोड़ लोग कर रहे ट्रेन सफर

तेल संकट का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ा है जो रोजाना निजी कार या बाइक से यात्रा करते थे। अब पेट्रोल बचाने के लिए लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सहारा ले रहे हैं। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी, कारोबारी और छात्र बड़ी संख्या में ट्रेन और बसों का इस्तेमाल कर रहे हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में लोकल ट्रेनों में यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ी है। कई रूटों पर जनरल कोच पूरी तरह भर जा रहे हैं।

टिकट बुकिंग में आई भारी तेजी

रेलवे आरक्षण केंद्रों पर भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। गुरुवार को सामान्य दिनों की तुलना में 10 से 20 प्रतिशत ज्यादा टिकट बुकिंग और पूछताछ दर्ज की गई। ऑनलाइन टिकट बुकिंग में भी तेजी देखने को मिली है। लोग बड़ी संख्या में ट्रैवल एजेंसियों और टिकट बुकिंग सेंटरों का रुख कर रहे हैं। रेलवे सूत्रों के अनुसार, सबसे ज्यादा दबाव मुंबई और दिल्ली रूट की ट्रेनों पर है। इन रूटों पर यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या अचानक बढ़ने से लंबी वेटिंग लिस्ट शुरू हो गई है।

जून के अंत तक मिल सकता है कन्फर्म टिकट

यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या का असर अब रिजर्वेशन सिस्टम पर साफ दिखाई देने लगा है। हावड़ा-मुंबई एक्सप्रेस, समरसता एक्सप्रेस, गोंडवाना एक्सप्रेस और छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों में मई महीने के लिए 50 से 80 तक वेटिंग पहुंच चुकी है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा स्थिति बनी रही तो कई ट्रेनों में जून महीने के आखिर तक ही कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना है। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को अब टिकट के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।

रेलवे पार्सल सेवा की बढ़ी मांग

तेल संकट का असर अब माल ढुलाई पर भी दिखाई देने लगा है। डीजल महंगा होने और सड़क परिवहन की लागत बढ़ने के कारण व्यापारी अब रेलवे पार्सल सेवा को ज्यादा बेहतर विकल्प मान रहे हैं। रेलवे पार्सल कार्यालयों में पिछले कुछ दिनों में बुकिंग तेजी से बढ़ी है। कारोबारी ट्रकों की बजाय रेलवे के जरिए सामान भेजना ज्यादा सस्ता और सुरक्षित समझ रहे हैं। इससे रेलवे की पार्सल सेवाओं पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

बसों में भी यात्रियों की भारी भीड़

रेलवे के अलावा बस सेवाओं में भी यात्रियों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है। रायपुर से छत्तीसगढ़ के अन्य शहरों और कस्बों की ओर जाने वाली यात्री बसों में गुरुवार को भारी भीड़ देखने को मिली। कई बसों में यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ा। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर सामान्य दिनों की तुलना में काफी ज्यादा भीड़ नजर आई। यात्रियों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की समस्या के कारण अब निजी वाहन चलाना मुश्किल हो गया है, इसलिए वे सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दे रहे हैं।

रेलवे प्रशासन नई व्यवस्था की तैयारी में

लगातार बढ़ रही भीड़ को देखते हुए रेलवे प्रशासन अब अतिरिक्त कोच लगाने और कुछ रूटों पर विशेष ट्रेनों के संचालन पर विचार कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में यात्रियों की संख्या इसी तरह बढ़ती रही तो कई रूटों पर नई व्यवस्थाएं लागू की जा सकती हैं। फिलहाल तेल संकट के बीच रेलवे और बस सेवाएं ही आम लोगों के लिए सबसे बड़ा सहारा बनी हुई हैं।

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