‘मैं आ रहा हूं… बालाघाट दौरे से पहले RAHUL GANDHI का ऐलान, पीड़ित आदिवासी परिवारों से करेंगे मुलाकात
भोपाल। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (RAHUL GANDHI) ने मध्य प्रदेश के बालाघाट दौरे से ठीक पहले एक भावुक और आक्रामक संदेश साझा करते हुए कहा है कि ‘मैं आज बालाघाट आ रहा हूं।’ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अपने विस्तृत बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह दौरा उन पीड़ित आदिवासी परिवारों के आंसू पोंछने के लिए है, जिन्होंने कथित बीमारी और राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार की प्रशासनिक उपेक्षा के चलते अपने मासूम बच्चों को खो दिया है। राहुल गांधी ने कहा कि वे इन परिवारों के साथ वक्त बिताकर यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि इस गहरे दुख और संकट की घड़ी में वे अकेले नहीं हैं, बल्कि पूरी कांग्रेस पार्टी और वे स्वयं उनके साथ मजबूती से खड़े हैं।
केन-बेतवा विस्थापितों और इंदौर के छात्रों की समस्याओं का किया जिक्र
अपने संदेश में राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के आदिवासियों से जुड़े हालिया घटनाक्रमों का सिलसिलेवार ब्योरा दिया। उन्होंने याद दिलाया कि कुछ ही दिन पहले उनकी मुलाकात ‘केन-बेतवा लिंक परियोजना’ के प्रभावित आदिवासी आंदोलनकारियों से हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस परियोजना के चलते कई आदिवासी गांव जलमग्न हो रहे हैं, लेकिन शासन की ओर से विस्थापितों को न तो उचित पुनर्वास दिया गया और न ही समय पर मुआवजा मिला। इसके विपरीत, हक मांगने वाले आदिवासियों को सरकारी दमन, हिंसा और प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। इसके अलावा, इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूँज’ कार्यक्रम का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वहां आदिवासी युवाओं ने जर्जर हॉस्टल्स, खराब भोजन, बुनियादी शिक्षा के अभाव और आरक्षण अधिकारों से हो रही छेड़छाड़ की गंभीर व्यथा सुनाई थी।
‘वनवासी बनाम मूल मालिक’: वैचारिक सोच पर तीखा हमला
राहुल गांधी ने राज्य की मौजूदा व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश के आदिवासियों की यह पीड़ा भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की उस बुनियादी सोच का परिणाम है, जो उन्हें देश का ‘पहला मालिक’ (आदिवासी) मानने के बजाय केवल ‘वनवासी’ मानती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के साथ-साथ उनके सम्मान, रोजगार और शिक्षा के अवसरों को भी सीमित करना चाहता है और सत्ता के अहंकार में किसी भी स्तर पर संवाद करने को तैयार नहीं है।
‘आपकी आवाज इस बहरी सरकार को पूरी शक्ति से सुनाऊंगा’
दौरे से पहले अपने संकल्प को दोहराते हुए नेता प्रतिपक्ष ने राज्य के आदिवासी समुदाय को आश्वस्त किया कि वे उनके जल, जंगल, जमीन और सम्मान के हर संघर्ष में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि पीड़ित और उपेक्षित वर्गों की आवाज को संसद से लेकर सड़क तक बुलंद करना उनका प्राथमिक लोकतांत्रिक कर्तव्य है। राहुल गांधी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि शासन चाहे जितना संवेदनहीन हो जाए, वे आदिवासियों के दर्द और उनके अधिकारों की बात को इस बहरी हो चुकी सरकार तक पूरी राजनीतिक शक्ति के साथ पहुंचाएंगे।
मैं आज बालाघाट आ रहा हूं।
उन आदिवासी परिवारों से मिलने, जिन्होंने बीमारी और BJP सरकार की उपेक्षा के कारण अपने मासूम बच्चों को खोया है। उनके साथ वक्त बिताकर उन्हें बताना चाहता हूं कि इस दुख में वो अकेले नहीं हैं – मैं उनके साथ हूं।
कुछ दिनों पहले केन-बेतवा आंदोलन के आदिवासी…
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 1, 2026
