Raipur News: कांग्रेस संगठन सृजन में महिलाओं की गैरमौजूदगी पर उठे सवाल, भाजपा ने कसा तंज
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रायपुर। कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत जिलाध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया जोरों पर है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार किसी भी जिले से महिला दावेदारों के नाम सामने नहीं आए हैं। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग शहर और ग्रामीण जिलों में एक भी महिला ने अब तक दावेदारी नहीं की है।
यह स्थिति तब है जब कांग्रेस लंबे समय से महिला सशक्तिकरण की बात करती रही है। अब सवाल उठ रहे हैं कि पार्टी के संगठन सृजन में महिलाओं को प्रतिनिधित्व कैसे मिलेगा।
जिलाध्यक्ष चयन में नहीं दिखीं महिलाएं
सूत्रों के मुताबिक, एआईसीसी और पीसीसी द्वारा नियुक्त ऑब्जर्वर्स इस समय जिलों में बैठकों के जरिए वन-टू-वन चर्चा कर रहे हैं। मगर अब तक किसी जिले से कोई महिला सामने नहीं आई। यही नहीं, राजनांदगांव, रायगढ़, कोरबा और बस्तर जैसे जिलों में भी महिला दावेदारों का नाम नहीं है।
सत्ता से बाहर आने के बाद महिला कांग्रेस की गतिविधियां भी लगभग ठप हो गई हैं। पिछले दो वर्षों में पार्टी महिला कांग्रेस के लिए नया चेहरा तक तय नहीं कर पाई है।
कांग्रेस का बचाव
इस मुद्दे पर कांग्रेस की महिला प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा, “कुछ जिलों में महिलाओं ने दावेदारी की है। अगर ऑब्जर्वर्स को बैठक के दौरान कोई योग्य महिला कार्यकर्ता मिलती है, तो निश्चित रूप से उसे अवसर दिया जाएगा।”
वहीं, पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने कहा, “पहले भी कई जिलों में महिलाओं को अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। जिलाध्यक्ष के अलावा संगठन में अन्य महत्वपूर्ण पद भी हैं, जहां महिलाओं को शामिल किया जाएगा। पार्टी 50% पद महिलाओं और एससी-एसटी वर्गों के लिए सुरक्षित रखती है।”
भाजपा ने साधा निशाना
इस पूरे मामले पर भाजपा विधायक सुनील सोनी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “महिलाओं का कांग्रेस से मोहभंग हो चुका है। अब पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में महिलाओं की उपस्थिति न के बराबर रह गई है। जिलाध्यक्ष पद के लिए एक भी महिला का नाम न आना इस बात का सबूत है।”
सोनी ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस महिला सशक्तिकरण की बातें तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उसके संगठन में महिलाओं की भूमिका लगभग खत्म हो चुकी है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कांग्रेस के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। एक तरफ पार्टी 50% महिला प्रतिनिधित्व की नीति की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जिलाध्यक्ष जैसे प्रमुख पदों पर महिलाओं की भागीदारी का अभाव पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाता है।
यदि कांग्रेस संगठन सृजन के इस दौर में महिला चेहरों को आगे नहीं लाती, तो यह आने वाले चुनावों में पार्टी की संगठनात्मक साख और जनसंपर्क रणनीति को कमजोर कर सकता है।
