Protest in PoK: PoK में बगावत, JAAC के विरोध प्रदर्शन से शहबाज-मुनीर बैकफुट पर
Protest in PoK
रायपुर। Protest in PoK: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जनता का विरोध-प्रदर्शन लगातार तेज हो रहा है। स्थानीय लोगों की मांगों और ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के आह्वान पर मुजफ्फराबाद सहित कई शहरों में बड़े प्रदर्शन हो रहे हैं। विरोध के कारण पाकिस्तान की सरकार और सेना के लिए स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है, जिससे प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर बैकफुट पर आ गए हैं।
विरोध प्रदर्शन की वजह
प्रदर्शनकारियों की कुल 38 मांगें हैं। इनमें प्रमुख मांगें हैं: PoK असेंबली में पाकिस्तान में रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करना और पाकिस्तान समर्थित मुस्लिम कॉन्फ्रेंस को आतंकी संगठन घोषित करना। JAAC के केंद्रीय नेता शौकत नवाज मीर ने कहा कि पिछले 70 वर्षों से PoK के लोग मौलिक अधिकारों से वंचित रहे हैं और अब उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
PoK के विभिन्न क्षेत्रों में हालात
- कोटली: सभी प्रमुख रास्तों को बंद कर दिया गया है। JAAC कार्यकर्ताओं द्वारा धरना-प्रदर्शन जारी है।
- धीरकोट: रावलकोट और बाग से लगभग 2,000 JAAC कार्यकर्ता मुजफ्फराबाद की ओर मार्च कर रहे थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें चार नागरिक मारे गए और सोलह अन्य घायल हुए।
- मुजफ्फराबाद: धीरकोट में हुई हिंसा के विरोध में लाल चौक पर 2,000 लोगों ने धरना दिया। बाद में प्रदर्शन को बाईपास पर स्थानांतरित किया गया। हवाई फायरिंग और आंसू गैस के गोले छोड़े गए, जिसमें दो नागरिकों की मौत हुई।
- दादियाल: चकस्वारी और इस्लामगढ़ से आने वाले काफिले पर पुलिस ने गोलीबारी की। दो लोग मारे गए और लगभग दस अन्य घायल हुए।
सरकार ने बातचीत का रास्ता अपनाया
PoK सरकार ने JAAC नेताओं को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। प्रधान मंत्री चौधरी अनवारुल हक ने कहा कि बातचीत वहीं से शुरू होगी जहां यह टूट गई थी। राज्य सरकार ने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है, लेकिन बातचीत के लिए तैयार रहने का संदेश दिया।
अंतरराष्ट्रीय विरोध प्रदर्शन
PoK के आंदोलन का असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। 2 अक्टूबर को लंदन में JAAC कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान उच्चायोग के सामने विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है।
पाकिस्तान सरकार का प्रोपेगेंडा
पाकिस्तानी मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म विरोध प्रदर्शनों को बाहरी ताकतों की चाल बताने में लगे हैं। ऐसा पहले भी देखा गया है कि पाकिस्तान सरकार और सेना हर आंतरिक विरोध को भारत प्रायोजित या विदेशी हस्तक्षेप के रूप में चित्रित करती रही है।
