Prashant Kishor: बिहार चुनाव में करारी हार के बाद प्रशांत किशोर का मौन उपवास, गांधी आश्रम में आत्ममंथन

बिहार विधानसभा चुनाव में जनसुराज पार्टी को मिली करारी हार के बाद इसके संस्थापक Prashant Kishor मौन उपवास पर बैठे हैं। वह पश्चिमी चंपारण के भितिहरवा गांधी आश्रम में 24 घंटे से मौन व्रत पर हैं और पार्टी की हार पर आत्ममंथन कर रहे हैं।

सुबह आश्रम पहुंचने पर प्रशांत किशोर ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने अपनी टीम के प्रमुख सदस्यों के साथ शांत भाव से आत्मचिंतन शुरू किया। इस दौरान हजारों कार्यकर्ता और समर्थक आश्रम में मौजूद रहे।

प्रशांत किशोर ने कहा कि यह उपवास कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ‘आत्मिक प्रायश्चित’ है। तीन वर्षों की पार्टी यात्रा के बाद वह यह सवाल करने के लिए यह कदम उठा रहे हैं कि जनता तक संदेश क्यों नहीं पहुंच पाया।

बिहार चुनाव नतीजे:

14 नवंबर को घोषित बिहार विधानसभा चुनाव में NDA को प्रचंड बहुमत मिला, जबकि महागठबंधन और जनसुराज पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। NDA को 202 सीटें मिलीं, महागठबंधन को 35, और जनसुराज पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली।

हार के बाद प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि उन्होंने जनता तक संदेश पहुंचाने में जो गलती हुई, उसके लिए वे माफी मांगते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जाति और धर्म के आधार पर कोई गलती नहीं हुई और उपवास केवल प्रायश्चित के लिए है।

पार्टी संगठन में बड़ा बदलाव:

हार के बाद जनसुराज पार्टी ने पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक सभी संगठनात्मक इकाइयों को भंग कर दिया है। पार्टी प्रवक्ता सैयद मसिह उद्दीन ने बताया कि अगले डेढ़ माह में नई इकाइयां बनाई जाएंगी।

राष्ट्रीय परिषद की बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता, जैसे पूर्व सेना उपाध्यक्ष एस.के. सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री रामचंद्र प्रसाद सिंह और अधिवक्ता वाई.वी. गिरी मौजूद थे। बैठक में हार के कारणों की समीक्षा और संगठनात्मक पुनर्गठन पर चर्चा की गई।

पार्टी ने राज्य की सभी 12 संभागों में वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी दी है, ताकि प्रभावी संगठनात्मक ढांचा फिर से स्थापित किया जा सके। अधिकांश उम्मीदवार अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए थे।

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