बिहार चुनाव हार के बाद प्रशांत किशोर ने किया 90% संपत्ति दान का ऐलान, जानिए PK के पास कितनी प्रॉपर्टी है?
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जन सुराज पार्टी (JSP) की करारी हार के बावजूद संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने हार मानने से इनकार कर दिया है। 238 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली उनकी पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी, जबकि 236 सीटों पर जमानत जब्त हो गई। कुल 16.77 लाख वोट और 3.34% वोट शेयर मिला, जो उम्मीदों से काफी कम रहा। हार की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए PK ने भितिहरवा आश्रम में 24 घंटे का मौन व्रत रखा और फिर जनता के सामने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने अपनी 90% संपत्ति ‘जन सुराज’ अभियान को दान करने का संकल्प लिया है।
90% संपत्ति और भविष्य की कमाई का 90% दान: PK का गांधीवादी कदम
मौन व्रत तोड़ते हुए PK ने कहा, “पिछले 20 सालों में अर्जित मेरी सारी चल-अचल संपत्ति—दिल्ली में परिवार के लिए एक घर को छोड़कर—जन सुराज अभियान के लिए दान की जाएगी।” उन्होंने यह भी ऐलान किया कि आने वाले 5 सालों में जितनी भी कमाई होगी, उसका कम से कम 90% हिस्सा बिहार के विकास और पार्टी के कामों में लगाया जाएगा। PK ने महात्मा गांधी से प्रेरित होकर 15 जनवरी से नया अभियान शुरू करने की बात कही। साथ ही, बिहारवासियों से अपील की कि वे सालाना कम से कम 1,000 रुपये पार्टी को दान करें।
यह घोषणा राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। विपक्ष ने इसे ‘नाटक’ बताया, लेकिन PK के समर्थक इसे सच्ची निष्ठा मान रहे हैं। 2021 से 2024 तक कंसल्टेंसी से 241 करोड़ रुपये कमाने वाले PK ने पार्टी फंडिंग को भी पारदर्शी बताया।
PK की संपत्ति का राज: अनुमानित नेट वर्थ 45-60 करोड़ रुपये
लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर PK के पास इतनी संपत्ति कैसे जमा हुई? मीडिया रिपोर्ट्स और हालिया खुलासों के मुताबिक, 2025 में प्रशांत किशोर की कुल संपत्ति 45 से 60 करोड़ रुपये (लगभग 6-8 मिलियन USD) के बीच आंकी गई है। यह मुख्य रूप से राजनीतिक कंसल्टेंसी, I-PAC (Indian Political Action Committee) और निवेश से आई है।
कमाई का मुख्य स्रोत: PK ने 2011 से कई बड़े चुनाव अभियानों की रणनीति बनाई, जैसे नरेंद्र मोदी का 2014 लोकसभा कैंपेन, नीतीश कुमार का 2015 बिहार चुनाव, ममता बनर्जी का 2021 प. बंगाल चुनाव। इनसे करोड़ों की फीस मिली। 2021-2024 में ही 241 करोड़ की वैध आय हुई, जिसका हर पैसा टैक्स में चला गया।
दिल्ली का घर: दान से अलग रखा गया एकमात्र संपत्ति, जहां परिवार रहता है। PK की पत्नी जाह्नवी दास डॉक्टर हैं।
कंपनी का योगदान: I-PAC ने BJP, JD(U), INC, AAP, YSRCP, DMK, TMC जैसे दलों के लिए काम किया। बाद में PK इससे अलग हो गए, लेकिन कमाई जारी रही।
हार के बावजूद उम्मीद: ‘फर्श पर होना भी शानदार है’
चुनाव परिणामों में JSP को ‘स्पॉइलर’ की भूमिका निभाने का श्रेय मिला। 35 सीटों पर JSP के वोट विजेता के अंतर से ज्यादा थे, जिससे NDA और महागठबंधन दोनों प्रभावित हुए। फिर भी, PK ने कहा, “अर्श पर या फर्श पर—हम फर्श पर हैं, लेकिन यह शुरुआत है।” पार्टी ने 3,000 किमी पादयात्रा की, नीतिगत सुधारों (जैसे ‘राइट टू रिकॉल’, बुजुर्गों को पेंशन) पर जोर दिया, लेकिन जाति-आधारित वोटिंग ने नुकसान पहुंचाया।
PK ने कहा कि वे फिर से जनता के बीच जाएंगे और बिहार में बदलाव की लड़ाई जारी रखेंगे। यह ऐलान न सिर्फ उनकी नेट वर्थ का खुलासा करता है, बल्कि बिहार की सियासत में नई बहस छेड़ रहा है—क्या PK का बलिदान बिहार को नई दिशा दे पाएगा?
