रेप, वीडियो, और उम्रकैद.. सजा के बाद रो पड़े JDS नेता प्रज्वल रेवन्ना! जानिए क्या है पूरा मामला
पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा के पोते और जनता दल (सेक्युलर) के पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को रेप केस में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। कर्नाटक की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने 1 अगस्त को उन्हें दोषी ठहराया और 2 अगस्त को सजा का ऐलान किया। इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें पीड़िता को ₹7 लाख रुपये मुआवजा देने और ₹10 लाख रुपये का जुर्माना भरने का आदेश भी दिया। सजा सुनते ही प्रज्वल कोर्ट में फफक कर रो पड़े।
IPC की किन धाराओं में हुई सजा?
कोर्ट ने प्रज्वल को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(K) (प्रभुत्व का उपयोग कर रेप) और 376(2)(N) (बार-बार बलात्कार) के तहत दोषी माना। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(E) और अन्य धाराएं भी आरोपपत्र में शामिल थीं।
क्या बोले प्रज्वल रेवन्ना?
अदालत में अंतिम बहस के बाद जब जज ने प्रज्वल से कुछ कहने को कहा, तो उन्होंने कहा – “मैं एक अच्छा सांसद रहा हूं, मैंने अपने माता-पिता को छह महीने से नहीं देखा। मैं मैकेनिकल इंजीनियरिंग का मेधावी छात्र हूं और राजनीति में बहुत जल्दी आ गया। मुझे फंसाया गया है, लेकिन मैं किसी पर आरोप नहीं लगाना चाहता।”
पीड़िता की कहानी और सबूत
यह मामला 48 वर्षीय घरेलू सहायिका से जुड़ा है, जो रेवन्ना परिवार के गन्निकाडा गेस्ट हाउस में काम करती थी। आरोप है कि प्रज्वल ने महिला के साथ दो बार—हासन और बेंगलुरु के आवासों पर—बलात्कार किया और इसका वीडियो अपने मोबाइल पर रिकॉर्ड किया। पीड़िता ने घटना के समय पहनी हुई साड़ी को सबूत के तौर पर संभाल कर रखा था, जिस पर स्पर्म के निशान पाए गए। इस साड़ी को कोर्ट में निर्णायक सबूत के तौर पर पेश किया गया।
जांच और चार्जशीट
इस केस की जांच सीआईडी की विशेष जांच टीम (SIT) ने की, जिसमें कुल 123 सबूत और 113 गवाहों को शामिल किया गया। करीब 2000 पन्नों की चार्जशीट तैयार की गई। ट्रायल सिर्फ सात महीनों में पूरा हुआ, जिसकी सुनवाई 31 दिसंबर 2024 को शुरू हुई और 18 जुलाई 2025 को समाप्त हुई।
चार और मामलों में आरोपी
प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ चार अलग-अलग यौन शोषण के मामले दर्ज हैं, जिनमें वह मुख्य आरोपी हैं। उनके खिलाफ पहली शिकायत अप्रैल 2023 में दर्ज हुई थी। सोशल मीडिया पर 2000 से अधिक आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के बाद यह मामला सार्वजनिक रूप से सुर्खियों में आया।
विशेष अभियोजक की मांग और अदालत का फैसला
विशेष अभियोजक ने कोर्ट से अधिकतम 10 साल की कठोर सजा की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष ने सजा में नरमी की अपील की थी। अंततः कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाते हुए कहा कि इस अपराध ने समाज में भय और पीड़ा पैदा की है और न्याय की दृढ़ता के लिए यह सजा जरूरी है।
