Pappu Yadav Arrested: मुश्किलों में पप्पू यादव, 31 साल पुराने केस में गिरफ्तारी, न्यायिक हिरासत में PMCH में भर्ती

Pappu Yadav Arrested: पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को पटना पुलिस ने 31 वर्ष पुराने मामले में शुक्रवार देर रात गिरफ्तार कर लिया। यह मामला वर्ष 1995 का बताया जा रहा है, जिसमें पटना के गर्दनीबाग इलाके में किराए के मकान को लेकर विवाद दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता विनोद बिहारी लाल ने आरोप लगाया था कि मकान किराए पर लेते समय यह जानकारी छिपाई गई कि उसे कार्यालय के रूप में उपयोग किया जाएगा, और बाद में उस संपत्ति पर कब्जा कर लिया गया।

इस संबंध में गर्दनीबाग थाने में एफआईआर संख्या 552/1995 दर्ज की गई थी। मामला लंबे समय से अदालत में लंबित था। अदालत द्वारा कई बार समन जारी किए गए, लेकिन लगातार अनुपस्थित रहने के कारण पहले गिरफ्तारी वारंट और फिर संपत्ति कुर्की का आदेश भी जारी किया गया।

गिरफ्तारी के बाद बिगड़ी तबीयत

कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस टीम ने शुक्रवार आधी रात पप्पू यादव को हिरासत में लिया। गिरफ्तारी के दौरान उनके समर्थकों ने विरोध जताया, जिससे कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। हालांकि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए उन्हें अपने साथ ले लिया।

गिरफ्तारी के बाद मेडिकल जांच के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई। पहले उन्हें IGIMS में भर्ती कराया गया, लेकिन बाद में अदालत ने दो दिन की न्यायिक अभिरक्षा में बेहतर इलाज के लिए पीएमसीएच (PMCH) भेजने का निर्देश दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी को निर्धारित की गई है।

गिरफ्तारी पर पप्पू यादव का बयान

गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव ने इसे राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने कहा कि वह NEET छात्रा के मुद्दे पर आवाज उठा रहे थे, इसलिए उन्हें डराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार सरकार और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी उन्हें निशाना बना रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि वह सच की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे, चाहे उन्हें किसी भी परिस्थिति का सामना करना पड़े। पप्पू यादव का दावा है कि सादी वर्दी में आए पुलिसकर्मियों के व्यवहार से उन्हें खतरे का आभास हुआ।

राजनीति में बढ़ी हलचल

इस गिरफ्तारी के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जहां इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पप्पू यादव इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बता रहे हैं।

अब सभी की नजरें 9 फरवरी की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस 31 साल पुराने मामले में आगे की कानूनी दिशा तय होगी।

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