युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर शिकंजा, केंद्र लाएगी सख्त कानून
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में विधेयक को मंजूरी, फास्ट-ट्रैक कोर्ट में 3 महीने में सुनवाई पूरी करने का प्रावधान
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्ष के लगातार प्रदर्शन के बीच पेपर लीक माफियाओं पर नकेल कसने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार (24 जुलाई 2026) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ‘पेपर लीक संशोधन विधेयक’ को मंजूरी दे दी गई है । इस नए विधेयक का मुख्य उद्देश्य संगठित अपराधों और परीक्षाओं में धाँधली करने वालों के खिलाफ अत्यंत कठोर कानूनी प्रावधान लागू करना है।
क्या है पूरा मामला?
प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार देर रात एक वीडियो संदेश में पेपर लीक मामलों पर सख्त कार्रवाई का ऐलान किया था । उन्होंने कहा था कि “हमारे युवाओं के भविष्य से बढ़कर कुछ नहीं है” और “युवाओं का भविष्य खराब करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा” । उनके इस बयान के बाद ही कैबिनेट ने विधेयक को मंजूरी दी है।
विधेयक की मुख्य विशेषताएं
प्रस्तावित संशोधन विधेयक के तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट को कानूनी मजबूती प्रदान की जाएगी । इन अदालतों के लिए तीन महीने की तय समयसीमा के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाना अनिवार्य होगा ।
कानून को और अधिक सख्त बनाते हुए इसमें दोषियों के लिए 10 साल तक की जेल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को इस संशोधन विधेयक का नोडल मंत्रालय बनाया गया है, जो अपराध की गंभीरता के आधार पर सजा के विभिन्न स्तर तय करेगा।
अबतक क्या कानून था?
बता दें कि अभी के समय में देश में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ लागू है। इसके तहत व्यक्तिगत स्तर पर धाँधली करने वालों को 3 से 5 साल की जेल और 10 लाख रुपए तक के जुर्माने का नियम है, जबकि सर्विस प्रोवाइडर की संलिप्तता पर 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं संगठित गिरोहों के लिए 5 से 10 साल की कैद और 1 करोड़ रुपए जुर्माने की व्यवस्था थी, जिसे अब नए संशोधनों के माध्यम से और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।
आंदोलन और सरकार का रुख
गौरतलब है कि NEET परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों के बाद पिछले एक महीने से देशभर में छात्रों का आंदोलन जारी है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्र शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं । हालांकि, विपक्ष ने इस विधेयक को अपर्याप्त बताते हुए इसे खारिज कर दिया है और मांग की है कि पहले शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए ।
Read more-
राहुल गांधी का बड़ा दावा: “चुनाव आयोग मदद कर रहा है”, वोट चोरी के पेश किए सबूत..
