अस्पताल में घुसे भाजपा नेता, महिला डॉक्टर से बदसलूकी का आरोप

कांकेर: छत्तीसगढ़ के पखांजूर सिविल अस्पताल में भाजपा नेताओं पर महिला डॉक्टर से अभद्रता और अस्पताल में ताला लगाने के आरोप के बाद स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं। घटना से नाराज स्वास्थ्य कर्मियों ने ओपीडी और इलाज सेवाएं बंद कर दीं, जिससे इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

बीती रात अस्पताल में हंगामा

जानकारी के मुताबिक, बीती रात भाजपा के पखांजूर मंडल अध्यक्ष दीपांकर राय अपने समर्थकों के साथ सिविल अस्पताल पहुंचे थे। आरोप है कि स्टाफ की कमी और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया गया। इसी दौरान एक महिला डॉक्टर से अभद्र व्यवहार किया गया और आक्रोश में आकर अस्पताल के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया गया।

प्रशासन ने खुलवाया ताला, लेकिन सेवाएं रहीं बंद

हंगामे की सूचना मिलने पर तहसीलदार मौके पर पहुंचे और समझाइश के बाद अस्पताल का ताला खुलवाया गया। हालांकि, घटना से आहत और नाराज स्वास्थ्य कर्मियों ने अगले दिन ओपीडी और इलाज सेवाएं बंद रखने का फैसला लिया। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ा, जिन्हें बिना इलाज लौटना पड़ा।

मरीजों को झेलनी पड़ी परेशानी

सुबह से ही दूर-दराज के गांवों से आए मरीज अस्पताल परिसर के बाहर बैठे रहे, लेकिन न तो कोई चिकित्सकीय परामर्श मिल सका और न ही उपचार शुरू हो पाया। अस्पताल के भीतर सन्नाटा पसरा रहा और स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप नजर आईं।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस के पखांजूर मंडल अध्यक्ष राजदीप हालदार ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में रहते हुए भाजपा के नेता अपनी ही सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। अस्पताल में ताला जड़ना इस बात का प्रमाण है कि व्यवस्थाएं कितनी बदहाल हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले कांग्रेस ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने की मांग को लेकर 18 दिनों तक आंदोलन किया था। कांग्रेस का आरोप है कि अस्पताल में ताला लगाने के बजाय उन जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों से जवाबदेही तय होनी चाहिए, जो व्यवस्था सुधारने के लिए जिम्मेदार हैं।

मरीजों की सेहत पर सवाल

फिलहाल पखांजूर सिविल अस्पताल में ओपीडी और इलाज सेवाएं बंद हैं। मरीज और उनके परिजन परेशान हैं। सवाल यह है कि राजनीतिक खींचतान और हंगामे के बीच आम जनता की सेहत की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा।

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