हड़ताल पर नर्सिंग ऑफिसर्स : गैर-डोमिसाइल उम्मीदवार हथिया रहे सीटें? NEET PG काउंसलिंग की चैट्स वायरल…
रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के सदस्य 29 से 31 दिसंबर 2025 तक तीन दिवसीय निश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की तैयारी में हैं। यह आंदोलन 11 सूत्रीय मांगों को लेकर चरणबद्ध तरीके से चल रहा है, जिसमें ग्रेड पे, वेतनमान, नर्सिंग अलाउंस और ड्रेस अलाउंस जैसी लंबित मांगें शामिल हैं। संघ की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रीना राजपूत ने बताया कि पिछले 10 वर्षों से ये मांगें लंबित हैं और शासन द्वारा गठित कमेटियों की सिफारिशों को लागू नहीं किया जा रहा।
संघ की प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पहले चरण में ज्ञापन सौंपा गया, दूसरे में काली पट्टी बांधकर सेवाएं दी गईं, और तीसरे में 15-17 दिसंबर को अस्पताल परिसर में एक घंटे का सांकेतिक प्रदर्शन किया गया। अब चौथे चरण में हड़ताल की नौबत आ गई है। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो प्रदेश स्तर पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी, जिससे अस्पतालों का कार्य पूरी तरह ठप हो सकता है। हालांकि, संघ ने स्पष्ट किया कि अति गंभीर मरीजों की देखभाल जारी रहेगी और मरीजों को नुकसान पहुंचाना उनका उद्देश्य नहीं है। अंबिकापुर चिकित्सालय में अधिकारियों के आग्रह पर नर्सें आवश्यक सेवाओं को बाधित किए बिना काम करेंगी।
अस्पताल प्रशासन की सख्ती, नए पत्रों में चेतावनी
नए जारी पत्रों से पता चलता है कि विभिन्न अस्पताल प्रशासन हड़ताल को रोकने के लिए सख्त रुख अपनाए हुए हैं। अंबिकापुर के राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध चिकित्सालय ने 26 दिसंबर को जारी पत्र में हड़ताल पर जाने वाले कर्मचारियों से मरीज हित में कार्यस्थल पर उपस्थित रहने का आग्रह किया, चेतावनी दी कि सेवाएं अति आवश्यक हैं और 500-600 मरीज प्रभावित होंगे। महासमुंद चिकित्सालय ने कर्मचारियों की कमी से सेवाएं प्रभावित होने की आशंका जताते हुए उचित प्रबंधन के निर्देश दिए। राजनांदगांव के भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय ने सामान्य प्रशासन विभाग के 2006 के प्रावधानों का हवाला देकर हड़ताल को प्रतिबंधित बताया और अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी दी। जगदलपुर के शहीद महेंद्र कर्मा स्मृति चिकित्सालय ने हड़ताल को असंवैधानिक बताकर सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी। इन पत्रों में उच्च अधिकारियों जैसे आयुक्त चिकित्सा शिक्षा, कलेक्टर आदि को सूचित किया गया है, जो दर्शाता है कि शासन स्तर पर इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जा रहा है।

NEET PG काउंसलिंग ‘घोटाला’: वायरल चैट्स ने उजागर की अनियमितताएं
इस बीच, स्वास्थ्य क्षेत्र में एक और विवाद NEET PG 2025 काउंसलिंग को लेकर गरमा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही टेलीग्राम चैट्स और मेरिट लिस्ट की स्क्रीनशॉट्स से पता चलता है कि गैर-डोमिसाइल (छत्तीसगढ़ के बाहर के) उम्मीदवार राज्य कोटा सीटें हथिया रहे हैं। एक वायरल चैट में ‘डॉ. टेंगेराइन’ नामक यूजर कहते हैं, “I am non domicile candidate, I filled the cg counselling without reading anything when they given opportunity.” अन्य यूजर्स ने भी पुष्टि की कि प्रॉस्पेक्टस में इसकी अनुमति दी गई है।



मेरिट लिस्ट में कई उम्मीदवारों के पास ‘Non CG Domicile and MBBS Passout from NMC-recognized Medical College other than Chhattisgarh’ लिखा है, जैसे रैंक 174 पर देवेंद्र सिंह चंदेल (UR, 173), रैंक 176 पर रिशिता जैन (UR, 175), और रैंक 181 पर संजय गुप्ता (UR, 180)। ये उम्मीदवार छत्तीसगढ़ के बाहर के हैं, लेकिन राज्य कोटा में शामिल हैं। आरोप है कि ‘सीट ओपन’ करने से बाहर के उम्मीदवार कम कटऑफ वाले राज्यों में सीटें ले जा रहे हैं, जो एक ‘गड़बड़ घोटाला’ है। टेलीग्राम ग्रुप ‘NEET PG 2025 C’ (1841 सदस्य) में यह चर्चा वायरल हो गई, जहां यूजर्स ने कहा, “बाहर वाले राज्य कोटा का सीट उठाते हुए… जल जंगल जमीन के बाद अब मेडिकल फील्ड की बारी।”
स्थानीय छात्रों के लिए अनुचित: ‘अपने ही राज्य में गैरों जैसा सलूक’
यह स्थिति छत्तीसगढ़ के स्थानीय छात्रों के लिए बेहद अनुचित साबित हो रही है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नवंबर 2025 में PG मेडिकल एडमिशन नियमों के रूल 11 को असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया, जिसमें डोमिसाइल या संस्थागत प्राथमिकता दी जाती थी। कोर्ट ने कहा कि मेरिट को डोमिसाइल या संस्थागत पसंद से ऊपर रखा जाना चाहिए, जो आर्टिकल 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है। इससे राज्य कोटा सीटें, जो राज्य करों से फंडेड हैं और स्थानीय जरूरतों के लिए हैं, अब गैर-डोमिसाइल उम्मीदवारों के लिए भी पूरी तरह खुल गईं।
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DocScanner 26-Dec-2025 2-00 pm
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स्थानीय छात्रों का तर्क है कि वे अपने राज्य के मेडिकल कॉलेजों में पढ़े हैं, लेकिन अब उच्च रैंक वाले बाहरी उम्मीदवार (जो बेहतर कोचिंग से आते हैं) सीटें ले जा रहे हैं। इससे राज्य में डॉक्टरों की कमी बढ़ सकती है, क्योंकि बाहरी उम्मीदवार राज्य में सेवा देने की बजाय वापस लौट सकते हैं। यह ‘अपने ही राज्य में गैरों जैसा सलूक’ जैसा लगता है, जहां स्थानीय छात्रों को अपनी ही सीटों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। छात्र संगठनों ने इसे ‘ब्रेन ड्रेन’ का खतरा बताया है, और मांग की है कि डोमिसाइल प्राथमिकता बहाल की जाए।

