Non-Working Population बढ़ी : छत्तीसगढ़ में 1.59 करोड़ से ज्यादा लोग आय से दूर
Non-Working Population
Non-Working Population के बढ़ते आंकड़े, राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती
Non-Working Population: आज छत्तीसगढ़ के कई परिवारों में एक ही व्यक्ति कमाने वाला होता है, जबकि बाकी सदस्य उस पर निर्भर रहते हैं—जैसे पढ़ाई कर रहे बच्चे या बुजुर्ग। ऐसे में घर की ज्यादातर आय रोजमर्रा के खर्च में ही खत्म हो जाती है, जिससे बचत और भविष्य के लिए निवेश करना मुश्किल हो जाता है।
छत्तीसगढ़ में ऐसे लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो किसी भी प्रकार की आय अर्जित करने वाली गतिविधि से जुड़े नहीं हैं। इस श्रेणी में 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे और 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग शामिल हैं। इन्हें गैर-कार्यशील या नॉन वर्किंग पॉपुलेशन कहा जाता है।
आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 तक राज्य में गैर-कार्यशील आबादी का आंकड़ा बढ़कर लगभग 1,59,64,759 तक पहुंचने का अनुमान है। जबकि वर्ष 2011 की जनगणना में यह संख्या 1,33,64,973 थी। यानी पिछले डेढ़ दशक में आश्रित आबादी में बड़ा इजाफा दर्ज किया गया है।
रायपुर और बिलासपुर में सबसे अधिक संख्या
राज्य के प्रमुख शहरी और औद्योगिक जिलों में Non-Working Population सबसे ज्यादा देखी जा रही है। रायपुर में यह संख्या सबसे अधिक 16.68 लाख से ज्यादा है
इसके बाद बिलासपुर में 12 लाख से अधिक, दुर्ग, बलौदाबाजार और कोरबा भी शीर्ष जिलों में शामिल हैं। वहीं, नारायणपुर (86,567) और सुकमा (1,18,554) जैसे जिलों में यह संख्या सबसे कम दर्ज की गई है।
आर्थिक दबाव और बढ़ती निर्भरता
Non-Working Population में वृद्धि का सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। जब बड़ी संख्या में लोग आय अर्जित नहीं करते, तो 15 से 59 वर्ष के कामकाजी वर्ग पर निर्भरता बढ़ जाती है। इससे एक ही व्यक्ति पर पूरे परिवार का आर्थिक भार आ जाता है, जिससे बचत और निवेश की क्षमता कम हो जाती है।
प्रति व्यक्ति आय और निवेश पर असर
जब परिवार में कमाने वाले कम और आश्रित ज्यादा होते हैं, तो आय का बड़ा हिस्सा रोजमर्रा के खर्च जैसे भोजन और स्वास्थ्य पर खर्च हो जाता है। इस कारण शिक्षा, कौशल विकास और अन्य उत्पादक क्षेत्रों में निवेश कम हो जाता है, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक विकास प्रभावित होता है।
सरकारी खर्च में बढ़ोतरी
बढ़ती Non-Working Population का असर सरकारी खजाने पर भी पड़ता है। सरकार को खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर अधिक खर्च करना पड़ता है। इसके चलते बुनियादी ढांचे जैसे सड़क, उद्योग और विकास परियोजनाओं के लिए बजट सीमित हो जाता है।
मानव संसाधन का कम उपयोग
यदि युवाओं का बड़ा वर्ग कार्य से जुड़ा नहीं रहता, तो राज्य को ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ का लाभ नहीं मिल पाता। इससे उत्पादन क्षमता घटती है और आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी हो जाती है। लंबे समय तक काम से दूर रहने पर युवाओं के कौशल में गिरावट आती है, जिससे भविष्य में रोजगार पाना और कठिन हो जाता है।

सामाजिक प्रभाव भी गंभीर
खाली बैठी युवा आबादी सामाजिक चुनौतियां भी बढ़ा सकती है। इससे अपराध दर और सामाजिक तनाव बढ़ने की आशंका रहती है, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है।
राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति बेहतर
हालांकि, देश के अन्य बड़े राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में आबादी अधिक होने के कारण गैर-कार्यशील लोगों की संख्या काफी ज्यादा है। हालिया सर्वे के अनुसार, छत्तीसगढ़ बेरोजगारी दर के मामले में देश में बेहतर स्थिति में है और शीर्ष 5 राज्यों में शामिल रहा है।
सबसे अधिक Non-Working Population वाले टॉप जिले (1 मार्च 2026)
रायपुर – 16,68,185
बिलासपुर – 12,03,022
दुर्ग – 11,31,110
बलौदाबाजार – 8,26,584
कोरबा – 8,06,207
रायगढ़ – 7,43,799
महासमुंद – 6,32,569
कबीरधाम – 5,80,506
बस्तर – 5,43,076
बेमेतरा – 5,21,913
