NHM कर्मचारियों ने बृजमोहन अग्रवाल से किया मुलाकात : सांसद ने दिया समर्थन, बोले- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री से करुंगा चर्चा
रायपुर– NHM के संविदा कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर रायपुर में पिछले आठ दिनों से धरने पर बैठे हैं। सोमवार को आंदोलनकारी कर्मचारी सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मिले। अग्रवाल ने कर्मचारियों की मांगों को जायज बताते हुए उनके समर्थन का आश्वासन दिया। साथ ही उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री से इस विषय पर चर्चा करने का वादा किया।
विभाग ने दी सख्ती की चेतावनी
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों की कई मांगों पर पहले ही निर्णय लिया जा चुका है। हालांकि, कर्मचारी पदाधिकारियों का कहना है कि उन्हें अब तक किसी आदेश की प्रतिलिपि नहीं दी गई है। आंदोलन के कारण प्रदेश भर की स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। ‘हमर क्लीनिक’ जैसे मोहल्ला स्तर के प्राथमिक उपचार केंद्र बंद हो गए हैं और कई स्वास्थ्य केंद्रों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
मिशन संचालक एवं आयुक्त डॉ. प्रियंका शुक्ला ने सभी सीएमएचओ को निर्देश दिया है कि वे ड्यूटी से अनुपस्थित कर्मचारियों की सूची बनाकर संयुक्त संचालक (NHM) कार्यालय को भेजें। अधिकारियों के मुताबिक, करीब 16,000 संविदा कर्मचारियों के आंदोलन के कारण चिकित्सा सेवाओं पर सीधा असर पड़ा है।
अस्पतालों पर बढ़ा दबाव
जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की भारी कमी देखी जा रही है। निचले स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने से अब मरीज जिला अस्पताल और बड़े मेडिकल संस्थानों का रुख कर रहे हैं, जिससे वहां भी अत्यधिक भीड़ हो रही है। आंबेडकर अस्पताल सहित कई संस्थानों में नर्सिंग स्टाफ की कमी की शिकायत सामने आई है, और वहां के स्टाफ ने वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है।
‘मोदी की गारंटी’ का सहारा
NHM कर्मचारी नियमितीकरण, ग्रेड पे जैसी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। मंगलवार को कर्मचारियों ने ‘मोदी की गारंटी’ के नारों और बैनरों के साथ तूता धरना स्थल पर रैली निकाली। महिला कर्मचारियों ने तीजा पर्व के अवसर पर भी आंदोलन में भाग लिया और परंपरागत रीति-रिवाज निभाते हुए धरना स्थल पर डटी रहीं।
आंदोलन और उग्र करने की चेतावनी
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे डॉ. अमित मिरी ने कहा कि प्रशासन केवल आश्वासन दे रहा है, जबकि अब तक कोई लिखित आदेश नहीं मिला है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और भी उग्र किया जाएगा।
मरीज हो रहे परेशान
‘हमर क्लीनिक’ जैसे प्राथमिक केंद्रों पर रोजाना लगभग 10 मरीज उपचार के लिए आते हैं। इस हड़ताल के कारण अकेले रायपुर जिले में प्रतिदिन लगभग 500 मरीज प्रभावित हो रहे हैं। इलाज न मिलने के कारण ये मरीज जिला अस्पताल या निजी डिस्पेंसरी का रुख कर रहे हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।
