NCRB Report : आकस्मिक मौतों में देश में तीसरे स्थान पर छत्तीसगढ़, आत्महत्या दर में चौथा स्थान

रायपुर। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की वार्षिक रिपोर्ट 2023 जारी हो गई है, जिसमें छत्तीसगढ़ दो गंभीर मामलों में देश के टॉप फाइव में शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, आकस्मिक मृत्यु दर में राज्य तीसरे और आत्महत्या दर में चौथे स्थान पर रहा है।

आकस्मिक मौतों के आंकड़े

एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2023 में छत्तीसगढ़ में 16,011 आकस्मिक मौतें दर्ज की गईं। इनमें से 230 मौतें प्राकृतिक कारणों से हुईं, जबकि 15,781 मौतें अन्य कारणों से हुईं। वर्ष 2022 की तुलना में इसमें करीब 5.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। उस समय राज्य में 16,893 आकस्मिक मौतें हुई थीं।
देशभर के राज्यों में सबसे ज्यादा आकस्मिक मृत्यु दर महाराष्ट्र (55.1) और हरियाणा (53.7) में रही, जिसके बाद छत्तीसगढ़ (52.9) का स्थान रहा। यह राष्ट्रीय औसत 31.9 से कहीं अधिक है। केंद्र शासित प्रदेशों में लद्दाख (75.4) और पुडुचेरी (66.5) सबसे ऊपर रहे।

प्राकृतिक आपदाओं से मौतें

देशभर में 2023 में प्राकृतिक कारणों से हुई कुल 6,444 आकस्मिक मौतों में से करीब 39.7 फीसदी यानी 2,560 मौतें आकाशीय बिजली गिरने से हुईं। छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक आपदाओं से हुई 230 मौतों में से 180 मौतें बिजली गिरने से हुईं।

नकली शराब से मौतें

एनसीआरबी रिपोर्ट में बताया गया है कि देशभर में 2023 के दौरान नकली शराब के सेवन की 456 घटनाओं में कुल 522 मौतें हुईं। इनमें छत्तीसगढ़ 37 मौतों के साथ चौथे स्थान पर रहा।

आत्महत्या दर में भी चिंताजनक स्थिति

आत्महत्या दर के मामले में छत्तीसगढ़ देश में चौथे नंबर पर है। 2023 में यहां 7,868 आत्महत्याएं दर्ज की गईं, जो 2022 (8,446) की तुलना में 6.8 प्रतिशत कम है।
देश में प्रति लाख जनसंख्या पर आत्महत्या दर 12.3 रही, जबकि छत्तीसगढ़ में यह दर 26 प्रतिशत रही। राज्यों में सबसे ज्यादा आत्महत्या दर सिक्किम (40.2), केरल (30.6) और तेलंगाना (27.7) की रही। केंद्र शासित प्रदेशों में अंडमान-निकोबार (49.6) और पुडुचेरी (28) छत्तीसगढ़ से आगे हैं।

सरकार का बयान

इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह आंकड़े मंगलवार को जारी हुए हैं। “इनका गहराई से विश्लेषण करने की आवश्यकता है। यह आंकड़े आज-कल के नहीं, बल्कि दो साल पुराने हैं। इसलिए पहले इन्हें समझना और उसके आधार पर आगे की रणनीति बनाना जरूरी होगा।”

 

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