Mohan Yadav सरकार का बड़ा एक्शन, भाजपा नेताओं और IAS अफसरों को खाली करने होंगे सरकारी बंगले
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. Mohan Yadav के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद पहली बार अपने ही नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने पात्रता समाप्त होने के बावजूद सरकारी बंगलों पर कब्जा जमाए बैठे भाजपा नेताओं और आईएएस अधिकारियों को नोटिस जारी कर 13 जनवरी 2026 तक आवास खाली करने के निर्देश दिए हैं। जरूरत पड़ने पर बलपूर्वक कार्रवाई के संकेत भी दिए गए हैं।
मध्य प्रदेश गृह विभाग ने बी और सी टाइप सरकारी आवासों की पात्रता को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा के परिवार और पूर्व राजस्व मंत्री रामपाल को सरकारी बंगला खाली करने के नोटिस जारी किए गए हैं। प्रभात झा के परिवार को 6 जनवरी 2026, जबकि पूर्व मंत्री रामपाल को दिसंबर के अंतिम सप्ताह में नोटिस दिया गया था।
गौरतलब है कि प्रभात झा वर्ष 2020 तक राज्यसभा सांसद रहे थे और उनका जुलाई 2024 में निधन हो चुका है। इसके बावजूद उनका परिवार अभी भी बी-टाइप सरकारी बंगले में रह रहा है। मीडिया से बातचीत में प्रभात झा के पुत्र तुष्मुल झा ने नोटिस मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि सरकारी आवास का उपयोग पात्रता रहने तक ही किया जाना चाहिए।
वहीं पूर्व राजस्व मंत्री रामपाल वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में हार गए थे, इसके बावजूद वे करीब दो वर्षों से लिंक रोड-1 स्थित सी-15 सरकारी आवास में रह रहे हैं। रामपाल का कहना है कि उन्होंने बंगला खाली करने के लिए सरकार से थोड़ा समय मांगा है।
इसके अलावा, पूर्व सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा भी विधानसभा चुनाव 2023 हारने के बावजूद अब तक सरकारी आवासों में रह रहे हैं।
सरकारी बंगलों पर कब्जे के मामले में भाजपा की महिला नेता भी पीछे नहीं हैं। भोपाल से पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर सांसद न होने के बावजूद सरकारी आवास में रह रही हैं। वहीं पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया, जो वर्तमान में विधायक नहीं हैं, अब भी मंत्री पद के दौरान मिले सरकारी बंगले में निवास कर रही हैं।
सिर्फ राजनीतिक नेता ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारी भी सरकार के रडार पर हैं। संपदा संचालनालय ने भोपाल में सात अपात्र अधिकारियों को सरकारी आवास खाली करने के नोटिस जारी किए हैं। इनमें चार आईएएस अधिकारी—सुधीर कोचर, अदिति गर्ग, रत्नाकर झा और निधि सिंह शामिल हैं।
मोहन यादव सरकार का यह कदम सरकारी संपत्तियों के दुरुपयोग पर सख्ती और प्रशासनिक अनुशासन स्थापित करने की दिशा में बड़ा संदेश माना जा रहा है।
