5 करोड़ की पार्किंग बनी, लेकिन मंत्रालय में अब भी पार्किंग का संकट बरकरार

मंत्रालय

छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक मुख्यालय में पार्किंग की समस्या लगातार गंभीर बनी हुई है। रोजाना बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी और आम नागरिक मंत्रालय पहुंचते हैं, लेकिन उनके वाहनों के लिए पर्याप्त और व्यवस्थित पार्किंग की सुविधा उपलब्ध नहीं है। स्थिति यह है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई मल्टीलेवल पार्किंग भी अभी तक उपयोग में नहीं लाई जा सकी है, जिससे लोगों को खुले स्थानों में वाहन खड़े करने पड़ रहे हैं।

तैयार ढांचा, लेकिन नहीं मिला संचालन का रास्ता

पार्किंग समस्या के समाधान के उद्देश्य से कुछ वर्ष पहले मल्टीलेवल पार्किंग परियोजना शुरू की गई थी। निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद पार्किंग सुविधा अब तक शुरू नहीं हो पाई है। परिसर को घेरकर बंद रखा गया है, जिससे यह ढांचा उपयोग के बजाय निष्क्रिय पड़ा हुआ है। इससे परियोजना की उपयोगिता और देरी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

खुले मैदान बने अस्थायी पार्किंग स्थल

मंत्रालय परिसर में आने वाले अधिकांश वाहन खुले मैदान और उपलब्ध खाली जगहों पर खड़े किए जा रहे हैं। गर्मी के मौसम में तेज धूप और बारिश के दौरान खराब मौसम का सीधा असर वाहनों पर पड़ता है। कर्मचारियों और आगंतुकों का कहना है कि लंबे समय से स्थायी समाधान का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।

सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर भी असर

पार्किंग की कमी का प्रभाव केवल सुविधा तक सीमित नहीं है। कई बार प्रवेश और निकास मार्गों के आसपास वाहन खड़े होने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। सुरक्षा एजेंसियों को भी अतिरिक्त निगरानी करनी पड़ती है, क्योंकि अव्यवस्थित पार्किंग से आवाजाही में बाधा उत्पन्न होती है।

आगंतुकों के लिए बढ़ी मुश्किलें

मंत्रालय आने वाले लोगों को पार्किंग नहीं मिलने पर सड़क किनारे या अन्य स्थानों पर वाहन खड़े करने पड़ते हैं। कई मामलों में गलत स्थान पर वाहन खड़े होने के कारण चालान की कार्रवाई भी हो जाती है। लोगों का कहना है कि जब पार्किंग का निर्माण पूरा हो चुका है तो उसे जल्द शुरू किया जाना चाहिए।

परियोजना को लेकर अलग-अलग दावे

जहां मंत्रालय स्तर पर पार्किंग सुविधा जल्द शुरू करने की मांग की जा रही है, वहीं संबंधित एजेंसी का कहना है कि परियोजना से जुड़े कुछ कार्य अभी बाकी हैं। भविष्य में अतिरिक्त निर्माण और विस्तार की योजना के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इसी वजह से पार्किंग का हस्तांतरण लंबित बताया जा रहा है।

सरकारी भवनों में भी दिख रही समान समस्या

अटल नगर और आसपास स्थित कई सरकारी परिसरों में भी पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। बढ़ती वाहनों की संख्या के मुकाबले उपलब्ध स्थान कम पड़ रहा है। ऐसे में कर्मचारियों और आम नागरिकों को रोजाना असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

खर्च हुआ करोड़ों में, सवाल अब जवाबदेही का

करोड़ों रुपये की लागत से तैयार सुविधा के उपयोग में नहीं आने से जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोग जानना चाहते हैं कि जब निर्माण पूरा हो चुका है तो पार्किंग आम उपयोग के लिए कब खोली जाएगी। फिलहाल यह मुद्दा प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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