अब छत्तीसगढ़ में बनेगी Craft Beer, सरकार ने दी Micro Brewery की अनुमति
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में माइक्रो ब्रुअरी (Micro Brewery) शुरू करने की अनुमति दे दी है। नई आबकारी नीति के तहत अब इच्छुक निवेशकों को लाइसेंस जारी किए जा सकेंगे। इस फैसले से राज्य में पहली बार स्थानीय स्तर पर तैयार की गई क्राफ्ट बीयर (Craft Beer) उपलब्ध होगी। सरकार का मानना है कि इससे पर्यटन, होटल उद्योग और निजी निवेश को नई गति मिलेगी, साथ ही आबकारी विभाग के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।
क्या होती है माइक्रो ब्रुअरी?
माइक्रो ब्रुअरी ऐसी इकाई होती है जहां सीमित मात्रा में बीयर तैयार की जाती है और उसे उसी परिसर में ग्राहकों को परोसा जाता है। यहां बनने वाली बीयर को क्राफ्ट बीयर कहा जाता है, जो ताजगी, बेहतर स्वाद और अलग-अलग फ्लेवर के लिए जानी जाती है। देश के कई राज्यों में यह मॉडल पहले से सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है और अब छत्तीसगढ़ भी इस दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
सामान्य बीयर से क्यों अलग होती है क्राफ्ट बीयर?
क्राफ्ट बीयर छोटे बैच में तैयार की जाती है, जिससे उसकी गुणवत्ता और स्वाद पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसमें प्राकृतिक माल्ट, हॉप्स और अन्य उच्च गुणवत्ता वाले अवयवों का उपयोग किया जाता है। ताजा परोसे जाने के कारण इसका स्वाद सामान्य औद्योगिक बीयर की तुलना में अधिक बेहतर माना जाता है और ग्राहकों को कई तरह के फ्लेवर का विकल्प भी मिलता है।

लाइसेंस के लिए तय किए गए मानक
सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी स्थापित करने के लिए न्यूनतम 4,000 वर्गफीट क्षेत्रफल वाले परिसर की अनिवार्यता तय की है। इसके अलावा अग्नि सुरक्षा, उपकरणों की गुणवत्ता और अन्य वैधानिक मानकों का पालन करना भी आवश्यक होगा। संबंधित रेस्तरां और ब्रुअरी एक ही परिसर में संचालित किए जा सकेंगे।
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हर साल 10 लाख रुपये होगी लाइसेंस फीस
नई व्यवस्था के अनुसार माइक्रो ब्रुअरी संचालकों को प्रति वर्ष 10 लाख रुपये लाइसेंस शुल्क देना होगा। प्रत्येक यूनिट को प्रतिदिन अधिकतम 1,000 लीटर क्राफ्ट बीयर उत्पादन की अनुमति होगी। तैयार बीयर पर निर्धारित उत्पाद शुल्क भी लागू होगा। अनुमान है कि एक गिलास क्राफ्ट बीयर की कीमत करीब 250 से 300 रुपये के बीच हो सकती है।
सरकार को मिलेगा अतिरिक्त राजस्व
सरकार का मानना है कि माइक्रो ब्रुअरी नीति लागू होने से राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और आबकारी विभाग की आय में भी इजाफा होगा। इससे आतिथ्य उद्योग को भी नई संभावनाएं मिलने की उम्मीद है।
