Meenakshi Natarajan के नामांकन विवाद में सुप्रीम कोर्ट की एंट्री, चुनाव रोकने से किया इनकार
Meenakshi Natarajan: नामांकन खारिज होने के खिलाफ कांग्रेस नेता की याचिका पर 12 जून को सुनवाई, चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप से कोर्ट का इनकार
राज्यसभा चुनाव के बीच Meenakshi Natarajan के नामांकन विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया और परिणामों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन याचिका पर सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी है। आखिर क्या है पूरा मामला और 12 जून की सुनवाई क्यों मानी जा रही है बेहद अहम? पढ़िए पूरी रिपोर्ट।
Meenakshi Natarajan के नामांकन विवाद में सुप्रीम कोर्ट की एंट्री, चुनाव रोकने से किया इनकार
मध्य प्रदेश में चल रही राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया के बीच कांग्रेस नेता Meenakshi Natarajan के नामांकन खारिज होने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। हालांकि शीर्ष अदालत ने फिलहाल चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए चुनाव और परिणामों पर रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया है। लेकिन कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर 12 जून को सुनवाई करने की सहमति दी है।
चुनाव प्रक्रिया पर रोक नहीं
सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने चुनाव प्रक्रिया और परिणामों की घोषणा पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि वह फिलहाल राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया में दखल नहीं देगा।
अदालत ने कहा कि मामले की सुनवाई तय समय पर की जाएगी, लेकिन इस चरण में कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही चुनाव परिणामों की घोषणा रोकने की मांग भी अस्वीकार कर दी गई।
नामांकन रद्द होने पर कांग्रेस का विरोध
कांग्रेस का आरोप है कि Meenakshi Natarajan का नामांकन पत्र नियमों के विपरीत खारिज किया गया है। पार्टी का कहना है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने कानून के प्रावधानों की अनदेखी करते हुए फैसला लिया। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि जिस मामले को आधार बनाकर नामांकन रद्द किया गया, उसमें अभी तक विधिक रूप से संज्ञान तक नहीं लिया गया था।
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस लगातार विरोध जता रही है और इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बता रही है।
चुनाव आयोग तक पहुंचा मामला
सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले कांग्रेस का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से भी मिला था। पार्टी नेताओं ने आयोग के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए नामांकन खारिज करने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की थी।
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा राज्यसभा की तीनों सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक दबाव की रणनीति अपना रही है।
भाजपा ने दिया जवाब
वहीं भाजपा का कहना है कि नामांकन पत्र में जरूरी जानकारियों का पूर्ण खुलासा नहीं किया गया था। इसी वजह से नियमों के तहत नामांकन निरस्त किया गया। भाजपा नेताओं का दावा है कि पूरी प्रक्रिया चुनावी नियमों के अनुसार हुई है और इसमें किसी तरह की राजनीतिक मंशा नहीं है।

राष्ट्रपति से मुलाकात की तैयारी
मामले को लेकर कांग्रेस अब और आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी में है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि पार्टी के सभी 62 विधायक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय मांग चुके हैं।
पटवारी के अनुसार, यदि राष्ट्रपति समय देती हैं तो कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल उनसे मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी देगा। यदि मुलाकात नहीं हो पाती, तो पार्टी आगे की रणनीति पर निर्णय लेगी।
12 जून की सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब इस पूरे विवाद में सभी की नजरें 12 जून को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से राज्यसभा चुनाव से जुड़े इस विवाद की दिशा काफी हद तक तय हो सकती है।
