शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय: सालभर बाद भी नहीं खुल सकी नई लाइब्रेरी: फंड जारी पर सीजीएमएससी ने अटकाया काम

दंत चिकित्सा महाविद्यालय

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रायपुर: छत्तीसगढ़ के शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त लाइब्रेरी का इंतजार अब भी बना हुआ है। कॉलेज प्रशासन ने एक साल पहले पुरानी लाइब्रेरी को अपग्रेड करने की योजना तैयार की थी, जिसके लिए आवश्यक बजट भी जारी कर दिया गया था, लेकिन निर्माण और संसाधन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संभाल रही सीजीएमएससी (छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन) की सुस्ती के कारण काम आगे नहीं बढ़ पाया है।

पुराना भवन बन सकता था मॉडर्न लाइब्रेरी

दरअसल, कॉलेज परिसर में स्थित एक पुराना भवन, जहां पहले 108 एंबुलेंस सेवा का कॉल सेंटर चलता था, उसे कोविड काल में स्टोरेज के रूप में इस्तेमाल किया गया। बाद में स्वास्थ्य विभाग ने यह भवन डेंटल कॉलेज को हैंडओवर कर दिया। कॉलेज प्रबंधन ने इसी भवन को आधुनिक सुविधाओं से लैस लाइब्रेरी में बदलने की योजना बनाई थी। फंड मिलते ही कॉलेज की स्वशासी समिति ने सीजीएमएससी को रिनोवेशन और संसाधन एकत्र करने की जिम्मेदारी दी थी, मगर एक साल गुजरने के बाद भी कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई।

विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त नहीं वर्तमान लाइब्रेरी

इस समय कॉलेज में लगभग 100 अंडरग्रेजुएट, 50 से अधिक पीजी और करीब 100 इंटर्न छात्र अध्ययन कर रहे हैं। इतने छात्रों के लिए मौजूदा लाइब्रेरी बेहद छोटी पड़ रही है। नई लाइब्रेरी के शुरू होने के बाद पुरानी को परीक्षा हॉल के रूप में उपयोग करने की योजना थी, जो अब अधर में लटकी हुई है। छात्रों को अब भी सीमित स्थान और संसाधनों के साथ पढ़ाई करनी पड़ रही है।

निःशुल्क इलाज योजनाएं भी अधूरी

कॉलेज में मुंह से जुड़ी गंभीर बीमारियों जैसे ओरल कैंसर और जबड़े की चोटों का इलाज निःशुल्क स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत होता है, लेकिन अन्य दंत उपचार फिलहाल इसके दायरे में नहीं आते। कॉलेज प्रशासन ने इन बीमारियों को भी योजना में शामिल करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा था, पर इस पर भी कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो पाई।

सुविधाएं बढ़ाने की प्रक्रिया जारी

डेंटल कॉलेज में हर दिन लगभग 250 से 300 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। बढ़ती भीड़ और जरूरतों को देखते हुए कॉलेज को जरूरी मशीनें और उपकरण देने की मंजूरी दी गई थी। साथ ही इलाज की दरों में बदलाव पर भी विचार किया गया था। हालांकि यह प्रक्रिया भी अभी तक केवल कागजों पर ही सीमित है।

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