CWC बैठक में खड़गे का मोदी सरकार पर तीखा हमला, बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों की निंदा से लेकर मनरेगा तक साधा निशाना

CWC बैठक

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नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की अहम बैठक में केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। बैठक की शुरुआत में उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र, संविधान और नागरिकों के अधिकारों पर चारों ओर गंभीर संकट मंडरा रहा है, और ऐसे हालात में कांग्रेस को भविष्य की स्पष्ट और मजबूत रणनीति तैयार करनी होगी।

बैठक में मनरेगा, आगामी विधानसभा चुनाव, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मतदाता सूची से नाम कटने की आशंका और केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान खड़गे ने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा भी की। सूत्रों के अनुसार, इन मुद्दों पर कांग्रेस अध्यक्ष दोपहर 2:15 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कर सकते हैं।

मनरेगा को खत्म करने का आरोप

खड़गे ने आरोप लगाया कि संसद के शीतकालीन सत्र में मोदी सरकार ने मनरेगा को व्यावहारिक रूप से समाप्त कर दिया, जिससे करोड़ों गरीब और कमजोर वर्ग के लोग बेसहारा हो गए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल गरीबों के पेट पर लात नहीं, बल्कि उनकी पीठ में छुरा घोंपने जैसा है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने इसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों और सम्मान पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा कि मनरेगा को खत्म करना संविधान की आत्मा के खिलाफ है।

सोनिया गांधी के लेख का हवाला

खड़गे ने सोनिया गांधी के एक लेख का जिक्र करते हुए कहा कि मनरेगा ने सर्वोदय की भावना को साकार किया और काम के अधिकार को मजबूती दी। उन्होंने कहा कि यह योजना संविधान के नीति निर्देशक सिद्धांतों और अनुच्छेद 41 की भावना से जुड़ी है, जिसके तहत यूपीए सरकार ने काम, भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अधिकारों को मजबूत किया था।

मनरेगा की शुरुआत से ग्रामीण बदलाव की कहानी

कांग्रेस अध्यक्ष ने याद दिलाया कि मनरेगा की शुरुआत 2 फरवरी 2006 को आंध्र प्रदेश के बंडलापल्ली गांव से हुई थी। इस योजना ने ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल दी।
उन्होंने कहा कि मनरेगा से: गांवों से पलायन रुका, अकाल और भूख से राहत मिली, दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और भूमिहीन मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा मिली

खड़गे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार को गरीबों की नहीं, बल्कि कुछ चुनिंदा बड़े पूंजीपतियों के मुनाफे की चिंता है।

कृषि कानूनों जैसा विरोध होगा: खड़गे

खड़गे ने कहा कि बिना किसी अध्ययन और परामर्श के मनरेगा को खत्म करना वैसा ही है, जैसा तीन काले कृषि कानूनों के साथ किया गया था। उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस देशव्यापी आंदोलन के जरिए सरकार को पीछे हटने पर मजबूर करेगी, जैसा भूमि अधिग्रहण और कृषि कानूनों के मामले में हुआ था।

कांग्रेस को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की तैयारी

संगठन सृजन अभियान का जिक्र करते हुए खड़गे ने बताया कि करीब 500 जिलों में नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति हो चुकी है। शेष प्रक्रिया को अगले 120 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस पूरी एकता के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।

SIR और मतदाता सूची पर चिंता

कांग्रेस अध्यक्ष ने मतदाता सूचियों से नाम काटे जाने की आशंका जताते हुए कहा कि गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर जाकर निगरानी करेंगे।
उन्होंने SIR को लोकतांत्रिक अधिकारों पर खतरा बताते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी और चुनाव आयोग की मिलीभगत से वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं।

आगामी विधानसभा चुनावों पर फोकस

खड़गे ने कहा कि अप्रैल-मई 2026 में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस पूरी ताकत से तैयारी करेगी।
इसके साथ ही 2027 में चुनाव वाले राज्यों में भी अभी से संगठन, रणनीति और मतदाता सूची पर काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप

खड़गे ने दावा किया कि पिछले 11 वर्षों में ED, IT और CBI का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को बदनाम करने के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि नेशनल हेराल्ड मामले में भी ऐसी ही राजनीतिक साजिशें हो रही हैं, जिनका कांग्रेस कानूनी तरीके से सामना कर रही है।

उन्होंने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों की निंदा के साथ-साथ भारत में क्रिसमस के दौरान कुछ संगठनों द्वारा सौहार्द बिगाड़ने की घटनाओं पर भी चिंता जताई। अंत में उन्होंने मनरेगा और अन्य मुद्दों पर एक्शन प्लान के लिए पार्टी नेताओं से सुझाव मांगे।

 

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