‘वन मित्र पोर्टल’ से ‘साहूकारों से मुक्ति’ तक… पूर्व CM ने बताया कैसे संवारा था आदिवासियों का हक, रिपोर्ट कार्ड पेश कर सरकार को घेरा

भोपाल। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने प्रदेश की वर्तमान भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट शेयर करते हुए आरोप लगाया कि आज प्रदेश में आदिवासी समुदाय के साथ हर स्तर पर अन्याय हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी 15 महीने की सरकार के दौरान आदिवासी कल्याण के लिए उठाए गए ऐतिहासिक कदमों को जनता के सामने रखा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के हालात देखकर आदिवासी समाज को कांग्रेस सरकार के कार्यकाल की याद आने लगी है। उन्होंने अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए तत्कालीन फैसलों का ब्योरा दिया।

मुख्यमंत्री मदद योजना 2019

आदिवासी परिवारों को सामाजिक और पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए 1 क्विंटल खाद्यान्न और 50 किलो शक्कर देने का प्रावधान किया गया था। साथ ही, आदिवासी गांवों में सामूहिक आयोजनों हेतु बर्तन आदि खरीदने के लिए 31.6 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे।

वन मित्र पोर्टल की शुरुआत

वन अधिकार कानून के तहत आदिवासियों के वनभूमि पट्टों के दावों को ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से निपटाने के लिए ‘वन मित्र पोर्टल’ लॉन्च किया गया। 20 आदिवासी जिलों की 89 जनपद पंचायतों की 5,211 ग्राम पंचायतों को इसके क्रियान्वयन के लिए 15,000 रुपये प्रति पंचायत प्रदान किए गए।

अस्वीकृत वन अधिकार दावों की पुनः समीक्षा

जून 2019 में तत्कालीन सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पहले खारिज किए गए करीब 3.5 लाख आदिवासी परिवारों के वन अधिकार दावों की फिर से जांच करने की घोषणा की थी।

वनभूमि से बेदखली पर रोक

सुप्रीम कोर्ट के फरवरी 2019 के आदेश के बाद आदिवासियों को बेदखली से बचाने के लिए एक मंत्रिमंडलीय समिति गठित की गई और निर्देश जारी किए गए कि अमान्य दावेदारों को आगामी आदेश तक वनभूमि से बेदखल न किया जाए।

तेंदूपत्ता संग्रहण दर में बढ़ोतरी

तेंदूपत्ता संग्राहकों के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए दर 2,000 से बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रति मानक बोरा की गई, जिससे संग्राहकों को 500 रुपये प्रति बोरा अतिरिक्त लाभ मिला।

अवैध साहूकारी और कर्ज से मुक्ति का फैसला

अनुसूचित क्षेत्रों में बिना लाइसेंस साहूकारी पर पूरी तरह रोक लगाने और गिरवी रखी जमीन, आभूषण व अन्य संपत्तियां आदिवासियों को वापस दिलाने का कड़ा निर्णय लिया गया।

बैंकिंग सुविधा और डेबिट कार्ड

आदिवासी वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ने और वित्तीय मदद आसान बनाने के लिए डेबिट कार्ड उपलब्ध कराने की घोषणा की गई, ताकि वे ATM से सीधे राशि निकाल सकें।

गांधी दर्शन योजना व सांस्कृतिक संरक्षण

जनजातीय कार्य विभाग के स्कूलों के विद्यार्थियों को साबरमती और वर्धा जैसे गांधीवादी ऐतिहासिक स्थलों का शैक्षणिक भ्रमण कराने की योजना शुरू की गई। इसके अलावा, आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और उनके देवी-देवताओं के धार्मिक स्थलों के संरक्षण हेतु आर्थिक सहायता देने की पहल हुई।

रोडमैप और आदिवासी वर्ग के कौशल विकास

कमलनाथ ने बताया कि उनकी सरकार के 5 साल के रोडमैप में आदिवासी वर्ग के कौशल विकास, स्वरोजगार, भूमि अधिकार और समावेशी विकास को केंद्र में रखा गया था।

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