Jyotsna Mahant on Naxalism: लोकसभा में नक्सलवाद पर गरमाई बहस, ज्योत्सना महंत बोलीं- “इस लड़ाई में हम सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं”
Jyotsna Mahant on Naxalism: नई दिल्ली में लोकसभा में नक्सलवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर अहम चर्चा हुई, जिसमें कोरबा की सांसद ज्योत्सना महंत ने बस्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की जमीनी स्थिति को विस्तार से रखा। देश को नक्सलवाद से मुक्त करने की निर्धारित समय सीमा 31 मार्च से ठीक एक दिन पहले हुई इस बहस को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सांसद ने अपने संबोधन में कहा कि नक्सलवाद दशकों से हर सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती रहा है और इसे केवल हथियारों से नहीं बल्कि विकास के जरिए समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस लड़ाई में वे सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं और इस मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है।
बस्तर की छवि पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया बस्तर को केवल हिंसा और संघर्ष के नजरिए से देखती है, जबकि इसकी असली पहचान इसकी समृद्ध खनिज संपदा और सांस्कृतिक विरासत है। उन्होंने जोर दिया कि यहां के संसाधनों का लाभ स्थानीय लोगों को मिलना चाहिए।
इस दौरान उन्होंने झीरम घाटी हमला का जिक्र करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक हत्या नहीं, बल्कि लोकतंत्र की हत्या थी। उन्होंने बस्तर में शांति के लिए अपनी जान गंवाने वाले सुरक्षाबलों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की और बताया कि पछले दो दशकों में सैकड़ों जवानों ने बलिदान दिया है।
सांसद ने यह भी बताया कि जिन इलाकों तक कभी पहुंचना मुश्किल था, जैसे नारायणपुर और ओरछा, वहां अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं, जो सकारात्मक बदलाव का संकेत है।
उन्होंने कहा कि बस्तर के लोगों के लिए सिर्फ सुरक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास पर लगातार काम करना जरूरी है, तभी नक्सलवाद की समस्या का स्थायी समाधान संभव है।
