हिंदी साहित्य की दुनिया को बड़ा झटका: ज्ञानपीठ सम्मानित साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल नहीं रहे, रायपुर एम्स में ली अंतिम सांस
विनोद कुमार शुक्ल
रायपुर: छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल का मंगलवार शाम निधन हो गया। 89 वर्ष की उम्र में उन्होंने रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अंतिम सांस ली। उनके निधन से साहित्य प्रेमियों और लेखकों में गहरा शोक व्याप्त है।
बीमारी से जूझते हुए ली अंतिम सांस
जानकारी के अनुसार, श्वसन संबंधी परेशानी के चलते उन्हें 2 दिसंबर को एम्स में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा, लेकिन उपचार के दौरान मंगलवार की शाम उनका निधन हो गया।
छत्तीसगढ़ के पहले ज्ञानपीठ सम्मानित साहित्यकार
कुछ ही दिन पहले विनोद कुमार शुक्ल को देश के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने वाले वे छत्तीसगढ़ के पहले लेखक थे। ज्ञानपीठ के महाप्रबंधक आर.एन. तिवारी ने उन्हें वाग्देवी की प्रतिमा और सम्मान राशि प्रदान की थी।
साहित्यकार विनोद शुक्ल की प्रमुख रचनाएँ:
नौकर की कमीज, अपने अकेले होने को, अब इस उम्र में हूँ, अब कभी मिलना नहीं होगा ऐसा था, अभी तक बारिश नहीं हुई, आकाश की तरफ़, आकाश से उड़ता हुआ, उपन्यास में पहले एक कविता रहती थी, एक अजनबी पक्षी, कहीं जाने का मन होता है, कक्षा के काले तख़्ते पर सफ़ेद चाक से बना, कोई अधूरा पूरा नहीं होता, घर-बार छोड़कर संन्यास नहीं लूंगा, चार पेड़ के, जगह-जगह रुक रही थी यह गाड़ी, जब बाढ़ आती है, जब मैं भीम बैठका देखने गया, जितने सभ्य होते हैं, तीनों, और चौथा केन्द्र में, पहाड़ को बुलाने, बाल कविताएँ, बोलने में कम से कम बोलूँ, मैं दीवाल के ऊपर, यह दिन उम्र की रोज़ी है, राजिम का विष्णु-मंदिर, शहर से सोचता हूँ, हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था
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भाषा और विचारों को लेकर दिया था प्रेरक संदेश
सम्मान समारोह के दौरान विनोद कुमार शुक्ल ने कहा था कि जब भाषाओं के अस्तित्व पर संकट की चर्चा हो रही है, तब उन्हें पूरा भरोसा है कि नई पीढ़ी सभी भाषाओं और विचारों का सम्मान करेगी। उन्होंने कहा था कि किसी भाषा या सकारात्मक विचार का खत्म होना, वास्तव में मानवता का क्षय है।
प्रधानमंत्री ने भी जाना था स्वास्थ्य हाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के 25वें स्थापना दिवस पर रायपुर दौरे के दौरान फोन कर विनोद कुमार शुक्ल का कुशलक्षेम जाना था। उस बातचीत में शुक्ल ने कहा था कि लेखन उनके जीवन का आधार है और वे जल्द स्वस्थ होकर फिर से लिखना चाहते हैं।
