Iran Israel War Impact on Oil: मिडिल ईस्ट संकट गहराया, भारत के आयात बिल पर बढ़ेगा दबाव?
Iran Israel War Impact on Oil: मिडिल ईस्ट में Iran, Israel और United States के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता पैदा कर दी है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद किए जाने की खबरों से कच्चे तेल की आपूर्ति पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। दुनिया की करीब 20% क्रूड सप्लाई इसी मार्ग से गुजरती है।
फरवरी में कच्चे तेल की कीमत करीब 6 डॉलर प्रति बैरल बढ़ चुकी है और हाल ही में यह 73 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। होर्मुज मार्ग भारत के लिए बेहद अहम है क्योंकि करीब 40% क्रूड और 55% एलएनजी इसी रास्ते से आता है। हालांकि भारत सीधे तौर पर ईरान से तेल नहीं खरीदता, लेकिन क्षेत्रीय अस्थिरता से सप्लाई टाइट हो सकती है और कीमतें बढ़ सकती हैं।
क्या है भारत का बैकअप प्लान?
रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने आकस्मिक योजनाओं पर काम शुरू कर दिया है। इनमें सऊदी अरब और यूएई के बंदरगाहों से अतिरिक्त लोडिंग, खाड़ी क्षेत्र से बाहर के देशों को नए ऑर्डर और वैकल्पिक सप्लाई चेन शामिल हैं।
फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बदलाव की संभावना कम है, क्योंकि पिछले तीन वर्षों से इनमें स्थिरता बनी हुई है। हालांकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से रिफाइनिंग मार्जिन घट सकता है, आयात बिल बढ़ सकता है और चालू खाता घाटे के साथ रुपये पर दबाव पड़ सकता है।
माना जा रहा है कि यदि तनाव लंबा चला तो इसका व्यापक असर भारतीय अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है।
