India International Rice Summit 2026: 9 जनवरी को रायपुर बनेगा वैश्विक चावल व्यापार का केंद्र, 11 देशों के खरीदार होंगे शामिल
India International Rice Summit 2026: पहले संस्करण की अभूतपूर्व सफलता के बाद इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट (IIRS) 2026 का दूसरा संस्करण 9 और 10 जनवरी 2026 को मैरा रिसॉर्ट एवं कन्वेंशन सेंटर, रायपुर में आयोजित किया जाएगा। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन द राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ (TREACG) द्वारा किया जा रहा है, जिसे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, APEDA, FICCI, CII, TPCI और AIREA का सहयोग प्राप्त है।
जनवरी 2025 में आयोजित IIRS के पहले संस्करण ने भारत और विदेशों से जुड़े चावल निर्यातकों, मिलर्स, खरीदारों, नीति-निर्माताओं और सेवा प्रदाताओं को एक साझा मंच प्रदान किया था। यह समिट केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में संपन्न हुआ था।
IIRS 2025 में 11 देशों के अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की भागीदारी रही थी। इसके साथ ही 21 प्रदर्शक, CEO राउंड टेबल, 25 से अधिक विशेषज्ञ सत्र, पैनल चर्चाएं, तकनीकी प्रस्तुतियां और नेटवर्किंग फोरम आयोजित किए गए थे। करीब 500 हितधारकों की मौजूदगी के साथ यह आयोजन वैश्विक चावल व्यापार के लिए एक प्रभावी मंच बनकर उभरा।
इसी मजबूत आधार पर IIRS 2026 को और व्यापक स्तर पर आयोजित किया जा रहा है। इस बार पश्चिमी, पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका, लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य पूर्व जैसे प्रमुख उपभोक्ता क्षेत्रों से राजनयिकों और चावल आयातकों को आमंत्रित किया गया है। समिट का मुख्य फोकस नॉन-बासमती चावल, GI-टैग्ड पारंपरिक किस्मों और फोर्टिफाइड राइस कर्नेल्स (FRK) के निर्यात को बढ़ावा देना होगा। साथ ही B2B बैठकों के माध्यम से खरीदारों और विक्रेताओं के बीच सीधे संवाद को प्रोत्साहित किया जाएगा।
भारत वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक और निर्यातक देश है, जो वैश्विक चावल व्यापार में लगभग 40 से 45 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। इस उपलब्धि में छत्तीसगढ़ की अहम भूमिका है, जहां से भारत के कुल चावल निर्यात का लगभग 15 प्रतिशत किया जाता है। राज्य से हर वर्ष करीब 30 लाख मीट्रिक टन चावल का निर्यात होता है, जिसकी अनुमानित कीमत 9,000 से 10,000 करोड़ रुपये है।
IIRS 2026 में लगभग 500 से अधिक हितधारकों की भागीदारी की उम्मीद है। कार्यक्रम के दौरान 30 से अधिक विशेषज्ञ सत्र, चावल मूल्य श्रृंखला से जुड़े 40 से ज्यादा प्रदर्शकों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी और वैश्विक खरीदारों की लक्षित सहभागिता देखने को मिलेगी।
यह समिट न केवल वैश्विक चावल व्यापार में भारत की भूमिका को और मजबूत करेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ को गुणवत्ता, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय चावल व्यापार के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
