सीजफायर के बावजूद हिंसा जारी.. हमास ने इजराइल के लिए मुखबिरी करने के शक में 8 लोगों को सरेआम मारी गोली

Gaza

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गाजा। दो साल की बमबारी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में बने सीजफायर समझौते से उम्मीद जगी थी कि इलाका धीरे-धीरे शांति की ओर बढ़ेगा। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। सीजफायर लागू होने के महज पांच दिनों बाद ही हमास ने कथित इजराइली मुखबिरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। मंगलवार, 14 अक्टूबर को गाजा सिटी में संगठन के लड़ाकों ने सार्वजनिक रूप से आठ संदिग्धों को गोली मार दी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

खौफनाक वीडियो: भीड़ के बीच घुटनों पर बिठाकर गोली मार दी
हमास ने अपने आधिकारिक टेलीग्राम चैनल पर वीडियो जारी किया, जिसमें आंखों पर पट्टी बांधे और हाथ बंधे आठ पुरुषों को सड़क पर घुटनों के बल बिठाकर हथियारबंद सदस्यों द्वारा गोली मारते दिखाया गया। घटना गाजा सिटी के सबरा इलाके में हुई, जहां भीड़ में बच्चे तक मौजूद थे। दर्शक “अल्लाहु अकबर” के नारे लगा रहे थे। हमास ने दावा किया कि मारे गए सभी इजराइली सेना को गुप्त जानकारी दे रहे थे और संगठन के नियमों का उल्लंघन कर रहे थे। बीबीसी वेरिफाई और सीएनएन जैसी एजेंसियों ने वीडियो की पुष्टि की है, जो 13 अक्टूबर को फिल्माया गया लगता है।

यह घटना हमास की सैन्य विंग अल-कस्साम ब्रिगेड्स द्वारा की गई, जो सीजफायर के बाद इलाके में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सीजफायर के बाद हमास ने कम से कम 33 लोगों को मारा है, जिनमें कबीले और गिरोह शामिल हैं जो संगठन के खिलाफ खड़े हो रहे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह “अराजकता” को काबू करने की कोशिश है, लेकिन मानवाधिकार संगठन इसे “अतिरिक्त न्यायिक हत्याएं” बता रहे हैं।

सीजफायर के बाद तनाव: हमास की सशस्त्र पुलिस सड़कों पर लौटी
एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, 14 अक्टूबर को ही हमास और गाजा के अन्य हथियारबंद गुटों के बीच गोलीबारी हुई। इजराइली सेना के कुछ हिस्सों से पीछे हटते ही हमास की सशस्त्र पुलिस ने काले नकाब पहनकर गश्त शुरू कर दी। सोमवार शाम को इजराइली जेलों से रिहा कैदियों की बस गाजा पहुंची, तो अल-कस्साम ब्रिगेड ने भीड़ को नियंत्रित किया। साथ ही, संगठन ने कथित इजराइली संपर्क वाले स्थानीय गिरोहों के खिलाफ अभियान चलाया।

ट्रंप प्रशासन के मुताबिक, सीजफायर का पहला चरण 10 अक्टूबर को शुरू हुआ, जिसमें 20 जीवित बंधकों की रिहाई और 2,000 फिलिस्तीनी कैदियों की रिहा हुई। लेकिन हमास ने अभी तक हथियार डालने का वादा नहीं निभाया। ट्रंप के 20-सूत्री योजना में हमास को गाजा की गवर्नेंस से बाहर करना और हथियारों का निरस्त्रीकरण शामिल है, लेकिन फिलहाल यह “सीमित सुरक्षा भूमिका” तक सीमित है।

ट्रंप का बयान: “हमास हथियार डालेगा, वरना हम डालवाएंगे”
ट्रंप ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमास को पूरी तरह निरस्त्र किया जाएगा। शांति तभी संभव है जब आतंक के ठिकानों को जड़ से उखाड़ फेंका जाए।” उन्होंने कहा कि अगर हमास “उचित समय” में हथियार नहीं डालता, तो अमेरिका “जल्दी और शायद हिंसक तरीके से” यह करेगा। ट्रंप ने हमास की कार्रवाई को “गैंग्स को साफ करने” का प्रयास बताया, लेकिन कहा कि अमेरिका इसे जांचेगा।

एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट्स से पता चलता है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने हमास की “नागरिकों पर अत्याचार और मनमानी फांसी” की निंदा की है, जबकि अरब देश चुप हैं। कुछ यूजर्स ने इसे “हमास का पुराना व्यवहार” बताया, जबकि अन्य ने न्यायिक प्रक्रिया की कमी पर सवाल उठाए।

गाजा की नाजुक स्थिति: दहशत और तबाही बरकरार
सीजफायर के बावजूद गाजा में तनाव चरम पर है। लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, बुनियादी सुविधाएं ठप हैं, और अकाल ने पांच लाख से अधिक फिलिस्तीनियों को प्रभावित किया है। हमास की इस कार्रवाई ने स्थानीय लोगों में दहशत फैला दी है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर हिंसा जारी रही, तो स्थिति फिर से युद्ध की ओर मुड़ सकती है।

ट्रंप की मध्यस्थता में मिस्र, कतर और तुर्की जैसे देशों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए, लेकिन इजराइल ने सहायता ट्रकों की संख्या आधी कर दी है, जिसे हमास उल्लंघन का आरोप लगा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब हमास के निरस्त्रीकरण और गाजा के पुनर्निर्माण पर नजर रखे हुए है, लेकिन रास्ता कठिन लग रहा है।

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