शौचालय घोटाला: 116 शौचालयों के निर्माण में अनियमितताओं के आरोप, एक ही फर्म को 61 लाख अग्रिम, काम अधर में
गरियाबंद। जिले के स्कूलों में 116 शौचालयों के निर्माण को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि प्रशासन ने इस काम को आदिवासी विकास विभाग को सौंपकर और एक ही फर्म को अनुबंध देकर नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं, जिससे काम अब तक शुरू नहीं हो सका है।
मामला फरवरी 2025 का है, जब स्कूल शिक्षा विभाग ने जिले के पांच ब्लॉकों में 116 शौचालयों के निर्माण की वित्तीय मंजूरी दी थी। प्रत्येक शौचालय 1.03 लाख रुपये में बनना था। लेकिन कलेक्टर के अनुमोदन के बाद यह काम आदिवासी विकास विभाग को सौंप दिया गया, जिसके पास पहले से ही 18 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य लंबित थे।
बड़े सवाल:
– आदिवासी विभाग को यह कार्य क्यों दिया गया, जबकि छोटे काम पंचायतों को भी दिए जा सकते थे?
– जुलाई में दुर्ग स्थित ‘कंचन कंस्ट्रक्शन’ फर्म के साथ गुपचुप अनुबंध कर 61 लाख रुपये की अग्रिम राशि क्यों जारी की गई?
– एक ही फर्म को जिले भर में फैले 116 काम क्यों दिए गए, जबकि उसके पास पर्याप्त संसाधन नहीं थे?
काम की स्थिति:
रिकॉर्ड के अनुसार, 116 में से 60 से अधिक शौचालयों का निर्माण अभी तक शुरू नहीं हुआ है। देवभोग ब्लॉक के सभी 20 शौचालय अधर में हैं। स्थानीय सरपंच संघ ने आरोप लगाया है कि प्रशासन जानबूझकर स्थानीय निकायों की उपेक्षा कर रहा है।
अधिकारियों का बयान:
प्रभारी सहायक आयुक्त नवीन भगत ने कहा, “कलेक्टर के निर्देश पर काम जारी किया गया। अगर प्रगति संतोषजनक नहीं है, तो कार्रवाई की जाएगी।”
कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने कहा, “मैं रिपोर्ट लूंगा। काम नहीं हो रहा तो एजेंसी पर कार्रवाई होगी।”
इस पूरे मामले में अनुबंध प्रक्रिया, फर्म चयन और काम की प्रगति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय सरपंचों ने पहले ही 28 नवंबर को इस मुद्दे को लेकर धरना प्रदर्शन किया था।
