3 मार्च को साल का पहला और सबसे लंबा चंद्र ग्रहण, जानें सूतक और शुद्धिकरण विधि
फाल्गुन पूर्णिमा के दिन 3 मार्च को साल का पहला और सबसे लंबा चंद्र ग्रहण लगेगा। सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में चंद्र ग्रहण को अशुभ माना जाता है। ग्रहण की अवधि 3 घंटे 27 मिनट रहेगी। यह दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक रहेगा। सूतक काल 9 घंटे पहले सुबह 6:20 बजे से शुरू हो जाएगा।
सूतक काल के दौरान मूर्ति स्पर्श, पूजा-पाठ, भोजन बनाना और भोजन करना वर्जित माना जाता है। इस समय मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद घर और मंदिर का शुद्धिकरण किया जाता है। सबसे पहले घर की सफाई की जाती है और सभी सदस्य स्नान करते हैं। ग्रहण के बाद दान-पुण्य का विशेष महत्व माना गया है। अन्न, वस्त्र या धन का दान किया जाता है। जरूरतमंदों को भोजन कराया जाता है और स्नान के बाद भगवान के दर्शन कर पूजा की जाती है।
ग्रहण के बाद घर शुद्ध करने की विधि
पूरे घर को नमक मिले पानी से धोएं।
इसके बाद गंगाजल का छिड़काव करें।
घर में गौमूत्र का छिड़काव करें।
हवन या धूप-दीप जलाएं।
वातावरण को शुद्ध करें।
ग्रहण के बाद मंदिर शुद्ध करने की विधि
मंदिर की अच्छी तरह सफाई करें।
साफ पानी से पोछा लगाएं।
प्रतिमाओं के वस्त्र हटाकर साफ करें।
गंगाजल छिड़ककर स्नान कराएं।
पुनः स्थापना कर फूल, वस्त्र और भोग अर्पित करें।
