शिक्षा विभाग के अफसरों की गलत जानकारी से सदन में मंत्री की फजीहत, विधानसभा को मिला झूठा जवाब!…
छत्तीसगढ़ विधानसभा
बिलासपुर जिले में सहायक शिक्षक संविदा भर्ती 2025 को लेकर शिक्षा विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। विभागीय अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने विधानसभा को गलत जानकारी भेजी, जिसके चलते स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को भी सदन में भ्रामक जवाब देना पड़ा। बाद में इसे “टंकण त्रुटि” बताया गया, लेकिन भर्ती से पहले सुधार न किए जाने से मामला और गंभीर हो गया है।
विधायक के सवाल से उजागर हुआ मामला
कोटा विधानसभा क्षेत्र के विधायक अटल श्रीवास्तव ने शिक्षक भर्ती में अनियमितताओं को लेकर विधानसभा में विस्तृत प्रश्न उठाए थे। उन्होंने विज्ञापन में पदों की संख्या, विषयवार विवरण, विज्ञान पदों पर कॉमर्स व आर्ट्स अभ्यर्थियों की नियुक्ति, प्राप्त शिकायतों और भर्ती के प्रभारी अधिकारियों की जानकारी मांगी थी। इन्हीं सवालों के जवाब के दौरान पूरी गड़बड़ी सामने आई।
मंत्री का जवाब और ‘टंकण त्रुटि’ की दलील
मंत्री की ओर से बताया गया कि वर्ष 2025 में बिलासपुर जिले में सहायक शिक्षक संविदा के 55 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी हुआ था। जवाब में यह भी कहा गया कि विज्ञापन में विज्ञान संकाय का उल्लेख टंकण त्रुटि के कारण हो गया था, जिसे शुद्धिपत्र जारी कर हटाया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया, जिससे भ्रम की स्थिति बनी।
गोल्ड मेडलिस्ट बाहर, अपात्रों को मिली एंट्री
जांच में सामने आया कि तय नियमों और दिशा-निर्देशों के बावजूद विज्ञान विषय के पदों पर कॉमर्स और आर्ट्स संकाय के अभ्यर्थियों की नियुक्ति कर दी गई। इस प्रक्रिया में योग्य और गोल्ड मेडलिस्ट उम्मीदवारों को चयन से बाहर कर दिया गया, जिससे भर्ती की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
कलेक्टर के आदेश पर जांच, रिपोर्ट में खुलासे
भर्ती में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर कलेक्टर बिलासपुर ने डीईओ को जांच के निर्देश दिए। दो प्राचार्यों की जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि चयनित कुछ अभ्यर्थी अनिवार्य योग्यता पूरी नहीं करते थे, इसके बावजूद उन्हें पात्र बताकर चयन सूची में शामिल किया गया, जो नियमों के खिलाफ है।
नियुक्तियों को बताया गलत, कार्रवाई की मांग
जांच समिति ने स्पष्ट रूप से इन नियुक्तियों को त्रुटिपूर्ण और नियमविरुद्ध बताया है। यदि इस मामले में दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो जिले के स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि विषय से असंबंधित शिक्षकों से पढ़ाई कराना बच्चों के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है।
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