खैरागढ़ में बड़ा खुलासा: फर्जी आदेश से 5 कर्मचारियों की नियुक्ति, मुख्य सचिव के नाम से जारी किया गया नकली पत्र
खैरागढ़। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में शिक्षा विभाग में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पांच कर्मचारियों की नियुक्ति का मामला सामने आया है। जांच में पाया गया कि सितंबर 2021 में राज्य शिक्षा आयोग के तत्कालीन सचिव डॉ. ओपी मिश्रा के नाम से जारी जिस आदेश के आधार पर ये नियुक्तियां की गई थीं, वह पत्र वास्तव में बैंक ऑफ बड़ौदा की विवेकानंद नगर शाखा को जारी किया गया था। दस्तावेजों पर मौजूद हस्ताक्षर भी आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे थे।
जांच के बाद तत्काल कार्रवाई
जिला शिक्षा अधिकारी लालजी द्विवेदी ने राज्य शिक्षा आयोग से मार्गदर्शन लेने के बाद फर्जी आदेश की पुष्टि होने पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम, 1966 के नियम 10(9) के तहत चारों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया। इसके बाद डीईओ ने थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (दस्तावेजों में जालसाजी), 468 (जालसाजी के लिए दस्तावेज तैयार करना), 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मामला पंजीबद्ध किया है।
किन्हें मिली थी फर्जी नियुक्ति
फर्जी आदेश के आधार पर शिक्षा विभाग ने मई 2022 में निम्नलिखित नियुक्तियां की थीं
टीकमचंद साहू – हाईस्कूल मोहगांव
फगेंद्र सिंहा – उच्चतर माध्यमिक शाला बकरकट्टा
रजिया अहमद – उमा शाला पैलीमेटा (सहायक ग्रेड-3)
अजहर अहमद – छुईखदान बीईओ कार्यालय (डाटा एंट्री ऑपरेटर)
सीएच एंथोनी – ठाकुरटोला उमा शाला (सहायक ग्रेड-3) – इन्होंने कभी कार्यभार नहीं संभाला।
कलेक्टोरेट में भी काम लिया गया
जिले के गठन के बाद रजिया अहमद को कलेक्टोरेट की डीएमएफ शाखा और अजहर अहमद को अभियोजन शाखा में अटैच किया गया था। फगेंद्र सिंहा और टीकमचंद साहू से डीईओ कार्यालय में काम लिया जा रहा था।
अगस्त 2025 में मामला उजागर
अगस्त 2025 में मामला सामने आने के बाद चारों ने अलग-अलग कारण बताते हुए अवकाश ले लिया था। लेकिन उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज और बचाव संतोषजनक नहीं पाए गए। लंबी जांच के बाद विभाग ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी हासिल करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
डीईओ का बयान
जिला शिक्षा अधिकारी लालजी द्विवेदी ने बताया कि प्रारंभिक स्तर पर ही नियुक्ति पत्रों की सत्यता पर संदेह हुआ था। राज्य शिक्षा आयोग से सत्यापन कराने पर फर्जीवाड़ा साबित हुआ। उन्होंने कहा कि शासकीय सेवा में किसी भी प्रकार की अनियमितता या धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। चारों कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है और पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई है। विभाग इस पूरे रैकेट की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेगा और यदि इसमें कोई और व्यक्ति संलिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी।
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की तह तक जाने की तैयारी कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फर्जी दस्तावेज किसने तैयार कराए और इस सिलसिले में कौन-कौन लोग शामिल थे।
