छत्तीसगढ़ में बढ़ सकते हैं बिजली के दाम: पावर कंपनी ने 6300 करोड़ घाटे की याचिका लगाई

छत्तीसगढ़ में आने वाले समय में बिजली उपभोक्ताओं को महंगाई का झटका लग सकता है। राज्य की पावर कंपनी ने करीब 6300 करोड़ रुपये के घाटे की भरपाई के लिए बिजली टैरिफ बढ़ाने की मांग की है। इस संबंध में कंपनी ने बिजली नियामक आयोग के सामने याचिका दायर की है, जिस पर फिलहाल मंथन चल रहा है। यदि आयोग इस घाटे को मान्यता देता है तो प्रदेश में बिजली की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा दबाव

दरअसल, बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की एक पावर कंपनी की याचिका पर फैसला देते हुए कहा था कि बिजली कंपनियों को होने वाले घाटे की भरपाई एकमुश्त की जानी चाहिए। इसके बाद राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल ने सभी राज्यों को इसी प्रकार की व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसी के चलते छत्तीसगढ़ राज्य पावर कंपनी ने भी अपने घाटे का पूरा लेखा-जोखा तैयार कर नियामक आयोग के सामने प्रस्तुत किया है।

राज्य सरकार की सब्सिडी से मिल सकती है राहत

विशेषज्ञों के अनुसार अगर आयोग पावर कंपनी के घाटे को लगभग 5000 करोड़ रुपये भी मान लेता है, तो बिजली टैरिफ में करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।हालांकि यदि राज्य सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सब्सिडी देती है तो बिजली की दरों में वृद्धि कम की जा सकती है। लेकिन यदि सरकार सब्सिडी नहीं देती है, तो घाटे के अनुपात में बिजली की कीमत बढ़ाना अनिवार्य हो जाएगा।

पावर कंपनी ने आयोग को सौंपा पूरा लेखा-जोखा

राज्य पावर कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नया टैरिफ तय करने हेतु बिजली नियामक आयोग में याचिका दायर की है। इस याचिका में कंपनी ने अपने संभावित राजस्व और खर्च का विस्तृत विवरण दिया है। कंपनी के अनुसार मौजूदा दरों के आधार पर उसे 26,216 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की संभावना है, जबकि सालभर का कुल खर्च 25,460 करोड़ रुपये बताया गया है। इस हिसाब से कंपनी को लगभग 756 करोड़ रुपये का लाभ हो सकता है।

हालांकि पिछले वर्षों के घाटे को जोड़ने के बाद स्थिति बदल जाती है। कंपनी के मुताबिक पुराने वित्तीय अंतर को समायोजित करने के बाद भी करीब 6300 करोड़ रुपये के अतिरिक्त राजस्व की जरूरत पड़ेगी।

घाटे के आधार पर तय होगा नया टैरिफ

बिजली नियामक आयोग ने इस मामले में जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी कर ली है और अब पावर कंपनी द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों की जांच की जा रही है। आयोग यह तय करेगा कि कंपनी का वास्तविक घाटा कितना है और उसी के आधार पर नया टैरिफ तय किया जाएगा। जानकारों का कहना है कि यदि आयोग 6300 करोड़ रुपये के घाटे को कम करके 5000 करोड़ रुपये भी मानता है, तब भी बिजली की दरों में करीब 20 प्रतिशत तक वृद्धि करनी पड़ सकती है। गौरतलब है कि पिछले साल करीब 500 करोड़ रुपये का घाटा मानने पर बिजली दरों में लगभग 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी।

घाटे को किस्तों में बांटने का भी विकल्प

नियामक आयोग के अधिकारियों के अनुसार एक विकल्प यह भी हो सकता है कि पूरे घाटे को एक साथ वसूलने के बजाय तीन वर्षों में तीन किस्तों में समायोजित किया जाए। हालांकि ऐसा करने पर केंद्र सरकार की आरडीएसएस (Revamped Distribution Sector Scheme) योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता प्रभावित हो सकती है। इसी कारण आयोग इस विकल्प पर भी सावधानी से विचार कर रहा है।

पहले भी सरकार दे चुकी है सब्सिडी

इससे पहले राज्य सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सब्सिडी दे चुकी है। करीब दो साल पहले सरकार ने बिजली कंपनियों को लगभग 1000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी थी, जिससे उपभोक्ताओं पर टैरिफ वृद्धि का बोझ कम पड़ा था।

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