चुनाव आयोग में मतभेद की खबरों पर विराम: SIR के सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए; विपक्ष ने बोला हमला

नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मचे घमासान के बीच भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर मतभेद की खबरों ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों के बीच SIR और चुनावी फैसलों को लेकर गंभीर असहमति है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि आयोग में कोई मतभेद नहीं है और SIR समेत सभी महत्वपूर्ण फैसले तीनों आयुक्तों की पूर्ण सहमति और सर्वसम्मति से ही लिए गए हैं।

आयोग ने बताया सर्वसम्मत फैसला, उठा था आपत्तियों का मुद्दा

निर्वाचन आयोग की ओर से साफ किया गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की सहमति से ही सभी नीतिगत निर्णय लिए गए हैं। आयोग के सूत्रों के अनुसार, किसी विषय पर व्यक्तिगत राय भले अलग हो सकती है, लेकिन संस्थागत स्तर पर सभी आदेश सर्वसम्मति से पारित किए गए हैं। इससे पहले ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया था कि नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच दोनों चुनाव आयुक्तों ने कम से कम 14 बार लिखित रूप से फैसलों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, ये आपत्तियां फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची में नाम जोड़ने-काटने के नियम और चुनावी डेटा तक पहुंच को लेकर थीं, जहां कुछ आदेश बिना दोनों आयुक्तों की पूर्व जानकारी के जारी होने का आरोप लगा था।

कांग्रेस बोली- ‘अपनी मर्जी से चल रहा आयोग’, सपा ने बताया लोकतंत्र पर हमला

इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कांग्रेस ने तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त की ही चल रही है और वे सत्ता पक्ष के इशारे पर काम कर रहे हैं। वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले को बेहद गंभीर करार देते हुए कहा कि यदि किसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के सदस्यों को सही तरीके से काम करने की आजादी नहीं है, तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक हालात हैं। अखिलेश यादव ने इसे लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से मामले का स्वतः संज्ञान लेने की अपील की।

अभिषेक बनर्जी ने मांगा CEC का इस्तीफा, सौरभ भारद्वाज ने की विपक्षी एकजुटता की अपील

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को तुरंत पद से हटाने और पूरे मामले की अदालत की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि किसी एक दल को फायदा पहुंचाने के लिए लाखों मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश सीधे लोकतंत्र की नींव पर हमला है, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय को संज्ञान लेना ही चाहिए। उधर आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी बात रखते हुए कहा कि देश की सभी विपक्षी पार्टियों को एकजुट होकर सबसे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त की निष्पक्षता और जवाबदेही के इस गंभीर मसले को प्राथमिकता से सुलझाना चाहिए।

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