छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ED सचिव सौम्या चौरसिया को फिर गिरफ्तार किया, आज कोर्ट में पेशी

रायपुर। छत्तीसगढ़ के 3200 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव रही सौम्या चौरसिया को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। ED के अनुसार, पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान राज्य में शराब कारोबार में बड़े पैमाने पर सिंडिकेट चलाया जा रहा था, जिसमें सौम्या चौरसिया कथित तौर पर कोऑर्डिनेटर की भूमिका निभा रही थीं।

 

ED ने कारोबारी पप्पू बंसल (उर्फ लक्ष्मी नारायण अग्रवाल), तांत्रिक केके श्रीवास्तव और अनवर ढेबर के होटल मैनेजर दीपेन चावड़ा के बयानों के आधार पर गिरफ्तारी की है। इसके अलावा, सौम्या चौरसिया, रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर और चैतन्य बघेल के बीच हुई वॉट्सऐप चैट्स से भी कई अहम सबूत मिले हैं। ED का दावा है कि घोटाले से सौम्या को करीब 100 करोड़ रुपये का लाभ हुआ।

 

मंगलवार को ED ने सौम्या को समन जारी कर पूछताछ के लिए जोनल ऑफिस बुलाया था। शाम 5:30 बजे के करीब उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। आज ED उन्हें रायपुर की PMLA स्पेशल कोर्ट में पेश कर रिमांड की मांग करेगी।

 

ढाई साल जेल में रह चुकी हैं सौम्या, यह दूसरी गिरफ्तारी

यह दूसरी बार है जब ED ने सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार किया है। इससे पहले 2 दिसंबर 2022 को कोयला लेवी घोटाले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था, जिसमें वे करीब ढाई साल जेल में रहीं। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के छह महीने बाद अब शराब घोटाले में दोबारा गिरफ्तारी हुई है।

 

सौम्या अब तक चार घोटालों में आरोपी रही हैं:

कोयला घोटाला (ED और EOW द्वारा गिरफ्तारी)

DMF घोटाला (EOW द्वारा)

आय से अधिक संपत्ति (49 करोड़ से ज्यादा, EOW द्वारा)

शराब घोटाला (3200 करोड़ का यह मामला)

 

चैट्स में अनिल टुटेजा को देती थीं निर्देश

ED की पांचवीं प्रॉसीक्यूशन कंप्लेंट में सौम्या की अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर और चैतन्य बघेल के साथ चैट्स का जिक्र है। इनमें सौम्या टुटेजा को निर्देश देती नजर आ रही हैं। एक चैट में उन्होंने अनवर ढेबर से कहा कि पप्पू बंसल को कोई हिसाब न दें, क्योंकि वह कलेक्शन को लेकर सवाल पूछ रहा था।

 

‘बिग बॉस’ वॉट्सऐप ग्रुप से चलता था नेटवर्क

सिंडिकेट ने शराब घोटाले को संचालित करने के लिए ‘बिग बॉस’ नाम का वॉट्सऐप ग्रुप बनाया था। इसमें सौम्या चौरसिया, अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, चैतन्य बघेल और पुष्पक जैसे लोग शामिल थे। इस ग्रुप में करोड़ों की हेराफेरी, मनी लॉन्ड्रिंग और पैसे के बंटवारे की चर्चा होती थी।

 

49 करोड़ से अधिक की बेनामी संपत्ति अटैच

अक्टूबर में ACB-EOW ने सौम्या के खिलाफ 8000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें बताया गया कि 17 साल की सेवा में उन्हें 2.51 करोड़ रुपये वेतन मिला, लेकिन उन्होंने 49.69 करोड़ की 45 बेनामी संपत्तियां खरीदीं, जो आय से 1872% अधिक है। ज्यादातर निवेश 2019-2022 के बीच हुआ। इन संपत्तियों को अटैच कर लिया गया है।

 

क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला?

ED की जांच के अनुसार, भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के MD एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट ने 3200 करोड़ से अधिक का घोटाला किया। इसमें राजनेता, अधिकारी और कारोबारी शामिल थे।

 

घोटाला तीन भागों में बांटा गया

 

A: डिस्टलरी से कमीशन

डिस्टलरी मालिकों से प्रति पेटी 75-100 रुपये कमीशन लिया जाता था। नुकसान न हो, इसलिए शराब की कीमतें बढ़ाई गईं और ओवर बिलिंग की छूट दी गई।

 

B: नकली होलोग्राम वाली शराब की बिक्री

अधिक शराब बनवाई गई, नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से बेची गई। होलोग्राम सप्लायर विधु गुप्ता, खाली बोतल सप्लायर अरविंद-अमित सिंह और परिवहन की जिम्मेदारी भी सिंडिकेट ने तय की। 15 जिलों में 40 लाख पेटी से अधिक अवैध शराब बेची गई। MRP पहले 2880 रुपये प्रति पेटी, बाद में 3840 रुपये की गई।

 

C: सप्लाई जोन बदलकर उगाही

देशी शराब के 8 जोन बनाए गए। टेंडर में जोन आवंटन कमीशन के आधार पर किया जाता था। तीन वर्षों में डिस्टलरियों से 52 करोड़ रुपये इस मद में वसूले गए।

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