एसईसीएल की 22 वर्षों से लंबित भूविस्थापन मांगों को लेकर महिलाओं ने शुरू की अंतिम लड़ाई, कार्यालय के गेट पर जड़ा ताला

कोरबा। दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की कुसमुंडा परियोजना से प्रभावित भूविस्थापित महिलाओं ने 22 वर्षों से लंबित मांगों को लेकर मंगलवार को अपनी “अंतिम लड़ाई” शुरू कर दी। आक्रोशित महिलाओं ने कुसमुंडा प्रबंधन कार्यालय के मुख्य द्वार पर ताला जड़कर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया और चेतावनी दी कि आंदोलन से उत्पन्न किसी भी व्यवधान की जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन की होगी।

 

इन महिलाओं का कहना है कि वे पिछले दो दशक से अधिक समय से रोजगार, सम्मानजनक पुनर्वास और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर संघर्ष कर रही हैं। हाल ही में 17 नवंबर को भी उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद दर्री तहसीलदार ने 21 नवंबर तक बैठक कर समाधान का लिखित आश्वासन दिया था। लेकिन यह वादा पूरा नहीं हुआ, जिसने महिलाओं के आक्रोश को चरम पर पहुंचा दिया।

 

एक प्रदर्शनकारी महिला ने कहा, “हम वर्षों से गेट जाम, खदान बंद और दफ्तरों के चक्कर लगाते-लगाते थक चुके हैं। एसईसीएल और प्रशासन के झूठे आश्वासनों से त्रस्त होकर अब हमने निर्णायक लड़ाई शुरू की है।”

 

महिलाओं की प्रमुख मांगों में पात्र भूविस्थापितों को तत्काल रोजगार, समुचित बसाहट और सभी लंबित मुद्दों का समयबद्ध समाधान शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों का ठोस समाधान नहीं होता, तब तक वे कार्यालय पर ताला बनाए रखेंगी।

 

 

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