नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटा, दतिया में BJP की एकजुटता पर उठे सवाल
पूर्व गृहमंत्री को टिकट न देने के फैसले से भड़के समर्थक, जिला अध्यक्ष समेत कई पदाधिकारियों ने दिए इस्तीफे, पार्टी के सामने एकजुटता बनाए रखने की बड़ी चुनौती
भोपाल/दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को होने वाला उपचुनाव अब सिर्फ चुनावी मुकाबला नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अंदरूनी राजनीति की बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है। पार्टी ने पूर्व गृह मंत्री और दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है, जिसके बाद दतिया का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो गया है।
‘नरोत्तम दादा’ के समर्थकों ने किया हंगामा
टिकट घोषित होते ही नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। 10 जुलाई की शाम से ही बड़ी संख्या में कार्यकर्ता राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर उतर आए और घंटों जाम लगा दिया । करीब 3,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों ने 12 घंटे तक हाईवे को अवरुद्ध कर रखा था, जिससे दोनों ओर 15 से 20 किलोमीटर लंबा जाम लग गया ।
हालात इतने बिगड़े कि पुलिस और प्रशासन को मोर्चा संभालना पड़ा। मध्यरात्रि के बाद जब प्रशासन ने जाम खुलवाने का प्रयास किया तो प्रदर्शनकारियों ने पथराव शुरू कर दिया । इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और हल्का बल प्रयोग किया । इस झड़प में दतिया एसपी समेत करीब 6 से 8 पुलिसकर्मी घायल हो गए । प्रशासन ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया ।
जिला अध्यक्ष समेत कई पदाधिकारियों ने दिए इस्तीफे
टिकट बदलने के फैसले का विरोध सड़कों तक ही सीमित नहीं रहा। BJP की दतिया जिला इकाई के अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा ने जिला कार्यकारिणी समेत कई स्थानीय पदाधिकारियों के साथ सामूहिक इस्तीफा दे दिया । उन्होंने पार्टी नेतृत्व को लिखे पत्र में टिकट देने के फैसले को “एकतरफा” और “जमीनी कार्यकर्ताओं के अपमान” के रूप में वर्णित किया । साथ ही, 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए मांग की कि फैसला बदलकर नरोत्तम मिश्रा को ही उम्मीदवार बनाया जाए ।
क्यों बदला गया टिकट? राजनीतिक समीकरण
नरोत्तम मिश्रा ने दतिया से 2008, 2013 और 2018 में लगातार तीन बार चुनाव जीता था । लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में वे कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती से 7,500 से अधिक वोटों से हार गए थे । जब अप्रैल 2026 में भारती को एक धोखाधड़ी मामले में सजा के कारण विधायकी से अयोग्य घोषित कर दिया गया, तो इस सीट पर उपचुनाव आवश्यक हो गया ।
माना जा रहा था कि BJP मिश्रा को ही मौका देगी, लेकिन पार्टी ने 2023 की हार, संगठनात्मक फीडबैक और स्थानीय असंतोष को देखते हुए एक नए चेहरे के साथ जाने का फैसला किया । आशुतोष तिवारी लंबे समय से RSS-BJP के संगठनात्मक पदों पर सक्रिय रहे हैं और उन्हें पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग का एक हिस्सा माना जा रहा है ।
अब आगे क्या?
दतिया उपचुनाव में BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष नहीं, बल्कि अपनी ही नाराजगी को शांत करना है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नरोत्तम मिश्रा आशुतोष तिवारी के समर्थन में खुलकर उतरते हैं या फिर मौन रहते हैं। यदि वे समर्थकों को एकजुट करने में सफल रहते हैं तो BJP नुकसान की भरपाई कर सकती है, लेकिन यदि नाराजगी बनी रहती है तो कांग्रेस और आजाद समाज पार्टी को इसका सीधा फायदा मिल सकता है ।
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